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user image Arvind Swaroop Kushwaha - 30 May 2020 at 7:24 PM -

सजीवी ग्रह

#दूसरे_ग्रह_के_लोग

जब भी इस विषय पर कोई बात होती है, पृथ्वी पर जीवन को ईश्वरीय चमत्कार मानने वालों का तर्क होता है कि अगर कहीं और जीवन है तो अब तक उसके सबूत क्यों नहीं मिले.. दूसरे शब्दों में एक तरह से इस संभावना को नकारना ... कहते हैं लेकिन अगर दूसरे तमाम ग्रहों पर जीवन है भी, तो उसका पता लगाना क्या हमारे लिये संभव है या कहीं से भी आसान है? जी नहीं.. यह हमारे लिये फिलहाल सिर्फ तुक्कों पर आधारित एक संभावना ही है, हकीकत यह है कि हमें सबसे नजदीकी ग्रह प्राॅक्सिमा बी को भी ठीक से देखने के लिये पृथ्वी के आकार का टेलिस्कोप चाहिये।

दरअसल पृथ्वी से या अभी स्पेस में मौजूद टेलिस्कोप से ऑब्जर्वर सिर्फ तारों को देखते हैं और उन तारों के प्रकाश में डिस्टर्बेंस से उनकी परिक्रमा करते ग्रहों का अनुमान लगाते हैं। ग्रहों का अपना कोई प्रकाश तो नहीं होता इसलिये वे दिखते भी नहीं, उनके बारे में जो भी डिटेल ली जाती है वह उस वक्त ली जाती है जब वे अपने होस्ट तारे के सामने से गुजरते हैं। इस मैथड को ट्रांजिट मैथड कहते हैं। इससे यह पता चल जाता है कि टार्गेटेड तारे की कोई पिंड परिक्रमा कर रहा है। इस मैथड के सिवा रेडियल विलाॅसिटी मैथड की सहायता भी ली जाती है।

यानि तारे की परिक्रमा करते पिंड की ग्रेविटी अपने स्टार पर असर डालती है जिससे वह पृथ्वी से देखने पर नजदीक आता या दूर जाता दिखता है, यह शिफ्ट बहुत मामूली होता है लेकिन डाॅप्लर स्पेक्ट्रोस्कोपी ऑब्जर्वेशन का यह एक मुख्य पहलू है जिससे पिंड का साईज, माॅस या तारे से उसकी दूरी वगैरह का अनुमान लगाया जाता है। अब इन दो तरीकों से किसी तारे के गिर्द किसी ग्रह की उपस्थिति तो पता चल जाती है लेकिन वह जीवन जीने लायक भी है या नहीं, यह इससे पता नहीं चलता।

बल्कि उस ग्रह की हैबिटेब्लिटी जानने के लिये अब बायो सिग्नेचर की मदद ली जाती है.. यानि उस ग्रह के कैमिकल्स, मिनरल्स और एटमास्फियर में मौजूद गैसों की स्टडी.. यानि ग्रह पर पड़ कर हमारे टेलिस्कोप में रिसीव हुई उस तारे की रोशनी के स्पेक्ट्रम में गैस और कम्पाउंड के साइन खोजे जाते हैं। यही बायो सिग्नेचर मैथड है.. लेकिन किसी प्लेनेट के एटमास्फियर में जीवन के सबूत देने वाली गैसों का मिलना भी यह निश्चित नहीं करता कि वहां जीवन है ही। जैसे मीथेन भी जीवन की एक पहचान है लेकिन मार्स और शनि के उपग्रह टाईटन पर इसकी मौजूदगी के बाद भी जीवन का न होना, कम से कम मंगल पर तो गारंटीड।

अब इन तुक्के टाईप अनुमानों से जो सबसे नजदीकी एक्सो प्लेनेट खोजे गये हैं, उनमें प्राॅक्सिमा B 4.2 लाईट ईयर, राॅस 128 B 11 लाईट ईयर और लुईटन B लगभग 12.2 लाईट ईयर दूर है.. यानि यह इतनी ज्यादा दूरी है कि हम कहीं भी कोई प्रोब तक नहीं भेज सकते, डायरेक्ट इन्हें देख नहीं सकते, बस इनसे गुजर कर हम तक पहुंची लाईट को ऑब्जर्व कर के ही तुक्के भिड़ा रहे हैं और हम कैसे भी इस बात की गारंटी नहीं पा सकते कि वहां जीवन है या नहीं जबकि हो सकता है कि वहां भी ठीक पृथ्वी जैसी ही इंटेलिजेंट लाईफ फल फूल रही हो। यह हमारे सबसे नजदीकी ग्रहों को ले कर हमारी औकात है, बाकी अपनी ही गैलेक्सी के दूर दराज के ग्रहों या दूसरी गैलेक्सीज के ग्रहों के बारे में खुद ही अंदाजा लगा लीजिये।

तो सारी बकवास का अर्थ यह है कि जीवन तो लाखों अरबों ग्रहों पर हो सकता है लेकिन यूनिवर्स के साईज के हिसाब से गैलेक्सीज और इन गैलेक्सीज में भी सोलर सिस्टमों के बीच की जो दूरी है, उसे देखते हुए हमारी औकात बस इतनी ही है कि हम टेलिस्कोपिक ऑब्जर्वेशन के सहारे अफसाने गढ़ते रहें और आसपास के सटे हुए दूसरे सोलर सिस्टम तक की जेम्स वेब टेलिस्कोप या पार्कर प्रोब जैसे मिशनों के सहारे जांच पड़ताल करते रहें। उन दूसरे जीवन से भरे ग्रहों के बारे में पता लगा पाना, उन्हें देख पाना, उनसे संपर्क कर पाना या उन तक पहुंच पाना फिलहाल हमारी औकात से बाहर है।

~ अशफ़ाक़ अहमद

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 20 Jan 2019 at 8:48 AM -

UP बोर्ड 2019 में 56 लाख से अधिक परीक्षार्थी होंगे

यूपी बोर्ड वर्ष 2019 में 56.46 लाख विद्यार्थी परीक्षा देंगे।
इसमें हाईस्कूल के 31.56 लाख व
इंटर के 24.90 लाख परीक्षार्थी होंगे।
यह परीक्षा 8,354 केंद्रों पर होगी।
लखनऊ जनपद के 112 केंद्रों पर एक लाख के करीब विद्यार्थी परीक्षा देंगे।

विद्यार्थियों को वेबसाइट पर उपलब्ध ... परीक्षा कार्यक्रम से अवगत कराया जाएगा।
प्रत्येक परीक्षार्थी को उत्तर-पुस्तिका का क्रमांक उपस्थिति शीट पर भी दर्ज करना होगा।

user image Arvind Swaroop Kushwaha

धन्यवाद रजनीश जी।

Friday, February 1, 2019
user image Rajnish Kumar

बहुत अच्छी जानकारी

Friday, January 25, 2019