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user image Arvind Swaroop Kushwaha - 25 Nov 2018 at 6:58 PM -

ठंडी हवा की जल धारण क्षमता कम होती है। इसलिए ठण्ड में हवा की नमी लगभग समाप्त हो जाती है। यही सूखी हवा जब जीवित व्यक्ति की त्वचा से टकराती है तो त्वचा की गर्मी से गरम हो जाती है जिससे उसकी जल धारण क्षमता ... बढ़ जाती है। फलतः हवा त्वचा की नमी को अपने साथ ले जाती है।
इस प्रकार सर्दियों में त्वचा खुश्क रहने लगती है और फिर कभी कभी चटकने अर्थात फटने लगती है। वैसलीन या चिकनाई लगाने से त्वचा की नमी हवा के संपर्क में नहीं आ पाती और इस प्रकार त्वचा सूखने/फटने से बच जाती है।
अभी सर्दी की शुरुआत है। अभी से केयर करेंगे तो त्वचा बड़ी क्षति से बच जायेगी।