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user image Arvind Swaroop Kushwaha - 22 May 2020 at 7:55 PM -

सृष्टि की अनिश्चितता

#यूनिवर्स_की_अनिश्चितता

दुनिया के ज्यादातर धार्मिक लोगों का मानना है कि ब्रह्मांड वेल डिजाइंड है, इंटेलिजेंट डिजाइन है, और कैसे सबकुछ व्यवस्थित रूप से चल रहा है जो यह साबित करता है कि कोई क्रियेटर है जिसे हम ईश्वर या अल्लाह कह सकते हैं.. लेकिन क्या ... आप जानते हैं कि यह सिर्फ लैक ऑफ नाॅलेज के आधार पर बना पर्सेप्शन है, क्योंकि हकीकतन ऐसा कुछ है ही नहीं।

यह बेहद खतरनाक, वायलेंट, अस्थिर और असुरक्षित जगह है जिसे हम यूनिवर्स के रूप में जानते हैं, लेकिन इसके साईज के हिसाब से जो इसकी चाल है वह हमारे लिये इतनी सुस्त है कि अगर कहीं दो चार लाख साल भी सुरक्षित निकल जायें तो हम साठ सत्तर साल की जिंदगी जीने वालों को लगने लगता है कि वाह कितनी सुरक्षित और बढ़िया जगह है.. लेकिन यूनिवर्स के स्केल पर दूरी और समय का जो पैमाना है, वहां यह सब जो हम अपने आसपास देखते महसूस करते हैं, वह नगण्य है।

पृथ्वी से दूर हर पल पूरी बेरहमी से ग्रहों, उपग्रहों का कत्ले-आम होता रहता है और यह सिलसिला अनवरत चल रहा है। किसी ग्रह की सीमा से बाहर निकलते ही आपको समझ में आता है कि कोई काॅस्मिक वेव आपके शरीर के एटम्स तोड़ कर एक सेकेंड में आपको हवा कर सकती है, कोई चावल के आकार का कंकर आपके लोहे के बने यान में गोली की तरह छेद कर सकता है। हर सेकेंड हजारों काॅस्मिक रेज यूनिवर्स में चकराती फिर रही होती हैं जो एक इंसान के तौर पर हमें एक पल में मार सकती हैं।

जो मैग्नेटोस्फियर हमें सोलर फ्लेअर से बचाता है, काॅस्मिक रेडिएशन से बचाता है, वह किसी ऐसे ही ज्यादा ताकतवर रेडिएशन के आगे दम तोड़ सकता है और यह सोलर फ्लेअर रोज हम पे चढ़ने दौड़ती हैं। इसके क्या इफेक्ट होंगे, यह हाॅलीवुड मूवी "द कोर" से समझ सकते हैं। 2004 में हमसे पचास हजार प्रकाशवर्ष दूर एक मैग्नेटार से पैदा हुई एक काॅस्मिक वेव ने हमारी ओजोन लेयर को बुरी तरह डैमेज किया था और इसके बारे में हमें पहले से कुछ नहीं पता था और न आगे पता होगा। अगर यह और नजदीक होता तो इसने पूरी लेयर डैमेज कर देनी थी। फिर हमारे लिये जिंदगी नामुमकिन थी यहां।

कहने का मतलब यह है कि यूनिवर्स में अरबों खरबों स्टार्स हैं, लगातार नये बन रहे हैं और खत्म हो रहे हैं, जब यह खत्म होते हैं तो इनमें तमाम एक सुपरनोवा विस्फोट करते हैं जिससे काॅस्मिक रेज की एक वेव पैदा होती है, या गामा रेज बर्स्ट, जो काफी दूरी तक अपने आसपास के सोलर सिस्टम्स को खत्म कर देती है.. साधारण भाषा में अपने जैसी संभावित दुनियायें समझिये। फिर यह मैग्नेटार, पल्सार, न्यूट्रान स्टार बन कर भी चैन से नहीं बैठते.. इनमें पैदा किसी तरह के फ्रिक्शन या हलचल वैसी ही शाॅक वेव पैदा करते हैं जैसी हमने 2004 में झेली थी। यह भी कई संभावित दुनियाओं को, उनके वातावरण को खत्म कर देते हैं।

यह सिलसिला यूनिवर्स में लगातार चल रहा है, कुछ प्लेनेट अभी बर्बाद हो कर लाखों या करोड़ों साल बाद फिर हैबिटेबल हो जाते हैं (डायनासोर युग के बाद पृथ्वी की तरह), तो कुछ हमेशा के लिये बर्बाद हो जाते हैं (मंगल या शुक्र की तरह).. हमारी अपनी गैलेक्सी में कई ऐसे न्यूट्रान, पल्सार, मैग्नेटार हैं और कुछ नजदीकी भविष्य में बन सकते हैं, बाकी इसके बाहर दूसरी लाखों गैलेक्सीज में तो यह ड्रामा निरंतर चल ही रहा है।

फिर हमारे लिये यही खतरे नहीं हैं.. गौर कीजिये कि यूनिवर्स में आवारा ग्रहों और रनअवे स्टार्स की भरमार है, मतलब जिनके पास कोई सोलर सिस्टम नहीं है.. ऐसा कोई स्टार हमारे सिस्टम के आसपास भी आया तो वह सभी ग्रहों-उपग्रहों के पथ अपनी ग्रेविटी से करप्ट कर देगा, साथ ही पूरे ओर्ट क्लाउड को अंदर की तरफ धकेल देगा और फिर यहाँ कुछ नहीं बचेगा। स्टार तो फिर नजर में आ जायेगा ऐसा करने से पहले लेकिन कोई बड़ा प्लेनेट अगर पास आया तो वह हम देख तक नहीं सकेंगे और वह पूरे सोलर सिस्टम को इस तरह डिस्टर्ब कर देगा कि फिर यहाँ कुछ नहीं बचेगा।

इनके सिवा हमारे आसपास अरबों छोटे बड़े काॅमेट्स/एस्टेराईड्स मौजूद हैं जिन्हें हम देख नहीं पाते, वे जब सूरज के नजदीक होते हैं तो उनके मटेरियल के वेपराइज होने पर बनने वाली टेल के जरिये उन्हें डिटेक्ट किया जाता है लेकिन यह प्रक्रिया उस वक्त होती है जब वे हमारे इतने नजदीक पहुंच चुके होते हैं कि हमारे पास बचाव का वक्त नहीं होता.. तो हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते और कोई एक बड़ा काॅमेट या एस्टेराईड पृथ्वी पर एक झटके से जीवन को खत्म कर सकता है जैसे डायनासोर काल में किया था।

ऐसे ढेरों इत्तेफाक हैं जिनके सहारे हम बच रहे हैं, आपको बचने के लिये लगातार ऐसे सुखद इत्तेफ़ाक़ों की जरूरत है जबकि बर्बाद होने के लिये बस एक बार किसी एक सुखद इत्तेफाक का न घटना.. जरूरी नहीं कि पृथ्वी हमेशा के लिये वीरान हो जायेगी लेकिन अगर इसकी किसी इत्तेफाक में मैग्नेटिक फील्ड तबाह होती है, या वातावरण नष्ट जाता है तब यह शुक्र या मंगल की तरह यह हमेशा के लिये बंजर हो जायेगी वर्ना डायनासोर युग की तरह खत्म होने के बाद भी करोड़ों साल तक हैबिटेबल बनी रही तो देर सवेर फिर जीवन पनप जायेगा..

यूं तो मंगल और शुक्र पर भी समंदर हुआ करते थे, मोटा वातावरण, मैग्नेटोस्फियर सब मौजूद थे और जीवन पनपने लायक स्थितियां मौजूद थीं लेकिन फिर एक झटके से सब खत्म हो गया.. यही इस वायलेंट यूनिवर्स की अनिश्चितता और असुरक्षा और सच्चाई है.. ऐसा ही एक इत्तेफाक कभी भी पृथ्वी को इसी परिणति पर ले जा सकता है। यह मत सोचिये कि ऐसा होने में लाखों या करोड़ों साल हैं.. सच यह है कि यह आज और अभी भी हो सकता है और हमें अहसास तक न हो सकेगा।

वेल.. आप यह सवाल उठा सकते हैं कि यह सब कैसे मान लें तो उसका जवाब यह है कि इसी दुनिया में बैठ कर पचासों टेलीस्कोप लगाये हजारों लोग यह सब पूरे यूनिवर्स में होते देख रहे हैं। अरबों खरबों गैलेक्सी, स्टार्स, प्लेनेट इसीलिये तो हैं कि हम लाईव माॅडल के सहारे उनका बनना, बिगड़ना और बिगाड़ना सब खुद से देख सकें जो उन ऑब्जेक्ट्स के लिये भले करोड़ों साल में होने वाली प्रक्रिया हो लेकिन एक कलेक्टिव सैम्पल के रूप में हमारे लिये तो सबकुछ अभी ही हो रहा है। यह किसी इंसान के पूरे जीवन को कुछ दिन में समझने जैसा है कि आप बच्चे से बूढ़े तक के हर एज/वर्ग के लोग एक जगह इकट्ठे कर लें और सभी संभावनाओं को जान समझ लें।

अगर आप इन बातों को ठीक से समझने में सक्षम हैं और फिर भी मानते हैं कि यूनिवर्स बहुत परफैक्ट और इंटेलिजेंट डिजाइन है, और किसी परमपिता ने आपके लिये एक बहुत सुरक्षित और निश्चितता से भरे जीवन की रचना की है तो आप बहुत क्यूट हैं जी.. हमारे दायें-बायें ही दो ऐसे ग्रह हैं जो कभी हमारे जैसे थे लेकिन आज नर्क हैं।

~ अशफ़ाक़ अहमदसनिश्चितस्त

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 18 Apr 2020 at 6:30 PM -

jogging

कोरोना कदमताल जोगिंग: My most favorite

बंधुओं, यदि आप सौ साल तक जीना चाहते हो, तो रोजाना जोगिंग अवश्य किया करें. मेरा शायद ही कोई दिन जाता होगा कि मैनें सुबह हजार कदम जोगिंग ना की हो.
लेकिन चूंकि अभी आप बाहर निकल कर गार्डेन में ... जोगिंग नहीं कर सकते, इसलिये मैं आपको घर बैठे ही जोगिंग करने का तरीका बताता हूँ.
आज मैं आपको इसके लाभ और करने के तरीके बताता हूँ.
एक ही जगह पर खडे होकर धीरे-धीरे कदमताल करे. दोनो पैर सीधे और समानांतर रखे. अब पंजो के बल खडे होकर अपने घुटनो को आगे-पीछे करे. पूरा शरीर ढीला छोड दे, ताकि पूरा शरीर लयबद्ध होकर हिलने लगे. इसके बाद हथेलियो को भी बाये-दाये घुमाते हुए लयबद्ध करे. आप देखेंगे कि आप लट्टू की तरह ट्विस्ट करने लगे हैं. धीरे धीरे शुरु शुरु में थोडे प्रयास की जरूरत पडेगी पर धीरे धीरे बैलेंस करना आ जायेगा.
बस आपको एक ही स्थान पर सिर्फ पंजों पर खड़े खड़े होकर घुटने आगे-पीछे करते हुए ऊपर उठी हुई एड़ी को ऊपर-नीचे करना हैं, लेकिन कदमताल की तरह पंजे के बल उछलना नहीं है, जम्पिंग नहीं करनी है, बस पंजो पर जमीन से टिके रह कर ट्विस्ट करते रहे. एक मिनट में ही पसीना छलकने लगेगा.
शुरू में १५० कदम से शुरू करें और हर दिन १० कदम बढाते जाएँ. मुंह एकदम बंद, सांस सिर्फ नाक से लें और छोड़ें. आधे समय बाद नाक से सांस लें और मुंह से छोड़ें. लेकिन मुंह से सांस अंदर कभी भूल कर भी ना लें. जब हाँफने लगें, तो भी मुंह से सांस अंदर ना लें.
फिर थोडी देर आराम करे.
तो चलिए, अब मैं आपको इसके लाभ बताता हूँ. और एक बार आपनें इसे जान-समझ कर शुरू कर दिया, तो निश्चित तौर पर आपकी जिन्दगी स्वस्थ और लम्बी हो जायेगी
१. इस कदमताल जोगिंग का सबसे ज्यादा लाभ है- कैलोरी बर्न होना और मोटापे पर कंट्रोल होना.
२. हार्ट और ब्लडप्रेशर की प्रोब्लम लाइफ में कभी भी नहीं होगी. लेकिन यदि आपको आलरेडी हार्ट या ब्लडप्रेशर की प्रोब्लम है, तो डाक्टर की सलाह पर ही बेहद धीरे और कम समय के लिए करें.
३. जब आप जोगिंग करेंगे तो उतने समय आपकी चर्बी तेजी से जलेगी और फिर खुल कर भूख लगेगी. इस तरह आपकी पाचन शक्ति बढ़ेगी और भोजन आसानी से पचेगा.
४. इस जोगिंग से भर्स्तिका प्राणायाम साथ ही हो जाएगा. सांस नालियों में फैलाव आएगा और वे चौड़ी और लम्बी होती जायेगी. ये बेहद इम्पोर्टेंट रो है जोगिंग का
५. कफ़ बाहर निकलेगा. जब आप कदमताल जोगिंग करेंगे तो रात का जमा हुआ कफ उछल कर बाहर निकलने लगेगा और आपका सारा फालतू कफ़ बाहर निकल जाएगा.
६. यदि आप शाम को कदमताल जोगिंग करते हैं तो आपको नींद बड़ी मीठी और अच्छी आयेगी.
७. आपको अंदर से ख़ुशी महसूस होगी और आपका मूड पूरे दिन अच्छा बना रहेगा
८. घुटनों की समस्या नहीं आयेगी. लेकिन जिनके घुटने खराब हो चुके हैं, वे धीरे-धीरे करे.
९. आपका फिगर शेप बेहतर होगा
तो और फिर क्या चाहिए? क्यों? कल से ही शुरू कर रहे हैं ना?
बस इतना ध्यान रखियेगा कि कपड़े टाईट ना हो. बीच में एकाध घूँट पानी पी सकते हैं. और शुरुवात धीरे-धीरे ही करें और खत्म भी धीरे-धीरे ही करें. साथ में मीठे गाने भी सुने तो सोने पर सुहागाअ
ईश्वर आपको सदा स्वस्थ-नीरोगी बनाए और लम्बी आयु दे
कमल झँवर

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 13 Apr 2020 at 9:31 PM -

इतिहास का मनोविज्ञान

विकसित क़ौमें, वर्तमान और भविष्य की बातें करती हैं.. पिछड़ी क़ौमें, अतीत की सच्ची-झूठी कहानियां सुनती-सुनाती हैं..

जिन लोगों में कोई काबलियत नहीं होती,
जिनकी अपनी कोई क़ामयाबी नहीं होती,
जिनकी अपनी कोई अहमियत और पहचान नहीं होती, वे अपने खानदान, जाति, धर्म या क्षेत्र की ... पहचान ओढ़ लेते हैं, और उसका गौरवगान करते रहते हैं.

कोई किस खानदान, जाति या धर्म में पैदा होता है, ये इत्तिफ़ाक़ की बात है, इसपे गर्व या शर्म की कौन-सी बात होती है ?

जिनको अपने वर्तमान पे गर्व नहीं है, उनको ही अपने अतीत पे गर्व करने की ज़रूरत पड़ती है, वह चाहे कितना भी झूठा क्यों न हो.

मैं बचपन से सुनता आया हूँ कि जो क़ौम अपना इतिहास भूल जाती है, उसका कोई वर्तमान या भविष्य नहीं होता.
लेकिन मैंने देखा है कि जो क़ौम अपना इतिहास नहीं भूलती, उसका कोई वर्तमान नहीं होता और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी नहीं होती.
ज़्यादातर इतिहास पक्षपाती नज़रिये से लिखा होता है. हर वर्ग, क़ौम, धर्म या देश का इतिहास मनचाहे तरीक़े से लिखा जाता है. उसमें ऐतिहासिक घटनाओं को इस तरह लिखा जाता है कि इतिहास गौरवशाली बन सके.

कुछ क़ौमों को ऐतिहासिक कारणों से सूरमा, बहादुर, लड़ाका क़ौम का मानसिक भरम मिल जाता है. मान लिया कि उनके पूर्वजों ने कुछ लड़ाइयां लड़ी होंगी.. तब लड़ाई लड़ने की ज़रूरत या मज़बूरी रही होगी. उनके आज के वारिसों ने कौन-सी लड़ाई लड़ी कि वे बेवजह अहंकार से भरे रहते हैं ?
देश में बेशुमार समस्यायें है, पूरा सिस्टम भृष्ट है, समाज में बेहिसाब कुरीतियां और बुराइयाँ हैं.. हज़ारों किस्म के अंधविश्वासों ने लोगों को जकड़ा हुआ है.. ये बहादुर क़ौमें ये सब देखकर बुज़दिल क्यों बनी रहती हैं ? हमारे हर तरफ़ कुछ न कुछ ग़लत होता रहता है, ये शूरवीर क्यों कायरों की तरह अनदेखा कर देते हैं ?

दरअसल किसी जाति या धर्म का बहादुर होना एक अंधविश्वास है.. जिसको लोग जाति या धर्म का गौरव बोलते हैं, ये झूठा अहंकार है, इस अहंकार पे जब भी ज़रा-सी चोट लगती है तो अहंकार की रक्षा करने के लिए लोग भीड़ में सूरमा बन जाते हैं.

भीड़ में शामिल होकर तोड़फोड़ करना बहादुरी नहीं होती, गुंडागर्दी और बहादुरी में बहुत फ़र्क़ होता है, लेकिन लोगों ने गुंडागर्दी को ही बहादुरी समझ लिया है.
जातिवादी, धार्मिक, राजनीतिक संगठनों में शामिल होकर काफ़ी गुंडे योद्धा बन जाते हैं, देश और समाज विरोधी अनसर भी देश और समाज के ठेकेदार बन जाते हैं.

इन्सान तो सांप, बिच्छू और कुत्तों से भी डरते हैं, किसी को डराना बहादुरी नहीं होती.. ख़ुद को शेर जैसा हिंसक जानवर समझना, अज्ञानता और मूर्खता की निशानी है.
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विकसित दुनिया वर्तमान में जीते हुए भविष्य की प्लानिंग करती है, और पिछड़ी दुनिया अपनी जाति, धर्म और देश का गौरव ढूंढने सदियों पुराने झूठे-सच्चे इतिहास में जाती है.

वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाने के लिये अतीत से सबक़ लिये जाते हैं,
ज़िंदा लोग मर चुके अतीत में नहीं जीते..
भूतकाल में भूत रहते हैं..
बेहतर भविष्य के लिये,वर्तमान में रहिये,
ज़िंदा इन्सान बनिये, अच्छे इन्सान बनिये.
वर्तमान और भविष्य को गौरवशाली बनाइये.

खानदान, जाति, धर्म, क्षेत्र की तंग सीमाओं से बाहर निकलिये और सारी इंसानियत से रिश्ता जोड़िये.
आपका भला हो जायेगा और इंसानियत का भी भला हो जायेगा...

रांझणा सूर्यवंशी

user image Rajnish Kumar - 09 Mar 2019 at 6:39 PM -

Awearness on online transaction

एटीएम फ्रॉड में क्या है 3 से 7 दिन का

अगर आप भी एटीएम कार्ड से पैसे निकालते हैं या ऑनलाइन बैंकिंग करते हैं तो आपको इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ने की जरूरत है. आप इस लेख को सेव करके भी रख सकते हैं. ...

एटीएम कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग में किसी फ्रॉड के मामले में अगर आपने तीन दिन के अंदर बैंक को शिकायत कर दी तो आपका पैसा वापस मिल जायेगा.



एटीएम कार्ड से किसी फ्रॉड या गलत लेन-देन पर आपको 3 से 7 दिन का नियम जरूर याद रखना चाहिए.

देश में बैंकिंग कारोबार के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक अकाउंट ग्राहक के हितों की रक्षा के लिए 6 जुलाई 2017 को एक सर्कुलर जारी किया है.

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क्या है सर्कुलर में?
भारतीय रिजर्व बैंक के इस सर्कुलर में कहा गया है कि अगर आपके बैंक अकाउंट से कोई फ्रॉड होता है और वह समय पर बैंक को इसकी सूचना देता है तो उसका नुकसान नहीं होगा. इस मामले में बैंक उसके पैसे की भरपाई कर देगा.

बैंक को 3 दिन के अंदर दें फ्रॉड की सूचना
भारतीय रिजर्व बैंक के सर्कुलर के मुताबिक अगर आपके बैंक अकाउंट से कोई अनधिकृत लेन-देन या फ्रॉड हुआ है तो आपको बैंक को इसके बारे में तीन दिन के अंदर जानकारी देनी होगी.

अगर आप ऐसा करते हैं तो इस मामले में आपकी जिम्मेदारी शून्य होगी. अगर अनधिकृत लेन-देन या फ्रॉड आपकी गलती या लापरवाही से नहीं हुआ है तो बैंक आपके नुकसान की पूरी भरपाई करेगा.

इसे भी पढ़ें: हैकिंग के इन 6 तरीकों से रहें इस तरह सावधान

देरी होने पर भी आपकी सीमित जिम्मेदारी
अगर आपके बैंक अकाउंट से अनधिकृत लेन-देन या फ्रॉड हुआ है और आपने बैंक को सूचना 4 से 7 दिन के बीच दी तो भी इस मामले में आपकी जिम्मेदारी सीमित होगी. इस स्थिति में आपको अनधिकृत लेन-देन की वैल्‍यू का एक हिस्‍सा उठाना पड़ेगा.

किस मामले में कितनी जिम्मेदारी?
अगर आपका बैंक अकाउंट बेसिक सेविंग बैंकिंग डिपॉजिट अकाउंट यानी जीरो बैलेंस अकाउंट है तो आपकी जिम्मेदारी 5,000 रुपये तक होगी. उदाहरण के लिए अगर आपके बैंक अकाउंट से 10,000 रुपए का अनधिकृत लेन-देन हुआ है तो आपको बैंक से 5,000 रुपये ही वापस मिलेंगे.

बाकी 5,000 रुपये का नुकसान आपको उठाना पड़ेगा.

बचत खाते पर ग्राहक की जिम्मेदारी 10,000 रुपये तक
अगर बैंक में आपका सामान्य बचत खाता है और आपके अकाउंट से अनधिकृत लेन-देन हुआ है तो आपकी जिम्मेदारी 10,000 रुपये तक होगी. उदाहरण के लिए अगर आपके बैंक अकाउंट से 20,000 रुपए का अनधिकृत लेन-देन हुआ है तो बैंक से आपको 10,000 रुपये ही वापस मिलेंगे.

बाकी 10,000 रुपए का नुकसान आपको उठाना पड़ेगा.

इसे भी पढ़ें: डेबिट कार्ड की जानकारी साझा न करें, हो सकते हैं वॉयस फिशिंग के शिकार

रिजर्व बैंक चला रहा है जागरूकता अभियान
बैंक और एटीएम ट्रांजेक्शन में धोखाधड़ी के बढ़ते मामले को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक का इन दिनों जागरूकता अभियान जोरों पर है. न्यूज पेपर, टीवी चैनल और रेडियो पर विज्ञापन देकर रिजर्व बैंक इस बारे में ग्राहकों को जागरूक करने में जुटा है.

रिजर्व बैंक के विज्ञापन में कहा जाता है-अगर आप बैंक फ्रॉड की किसी घटनाकी जानकारी बैंक को तीन दिन में दे देते हैं तो आपको अपनी रकम वापस मिल सकती है.