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user image Arvind Swaroop Kushwaha - 28 Jul 2021 at 8:55 AM -

World nature consevation day

इसको हिंदी में 'विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस' कहा जाता है।
उर्दू में प्रकृति को कुदरत कहते हैं। इस लिहाज से इसे 'जहां कुदरत रखरखाव दिवस' कह सकते हैं।

बात जब नेचर के संरक्षण की है तो यह जानना होगा कि नेचर को हानि किससे है।

ग्लोबल वार्मिंग से ... नेचर को सर्वाधिक खतरा है। ग्लोबल वार्मिंग रोकने के लिए हमें कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्पादन कम करना होगा और ऊर्जा की खपत कम करनी होगी।
और भी अनेक विचारणीय बिंदु हैं जिनपके बारे में पता लगाना चाहिए।

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 28 Apr 2020 at 8:10 AM -

samrat ashok ka arambhik jivan

आरंभिक जीवन
चक्रवर्ती अशोक सम्राट बिन्दुसार तथा रानी धर्मा का पुत्र था। लंका की परम्परा में बिंदुसार की सोलह पटरानियों और १०१ पुत्रों का उल्लेख है। पुत्रों में केवल तीन के नामोल्लेख हैं, वे हैं - सुसीम जो सबसे बड़ा था, अशोक और तिष्य। तिष्य अशोक ... का सहोदर भाई और सबसे छोटा था। एक दिन धर्मा को स्वप्न आया कि उसका बेटा एक बहुत बड़ा सम्राट बनेगा। उसके बाद उसे राजा बिन्दुसार ने अपनी रानी बना लिया। चूँकि धर्मा क्षत्रिय कुल से नहीं थी, अतः उसको कोई विशेष स्थान राजकुल में प्राप्त नहीं था। अशोक के कई (सौतेले) भाई -बहने थे। बचपन में उनमें कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती थी। अशोक के बारे में कहा जाता है कि वो बचपन से सैन्य गतिविधियों में प्रवीण था। दो हज़ार वर्षों के पश्चात्, सम्राट अशोक का प्रभाव एशिया मुख्यतः भारतीय उपमहाद्वीप में देखा जा सकता है। अशोक काल में उकेरा गया प्रतीतात्मक चिह्न, जिसे हम 'अशोक चिह्न' के नाम से भी जानते हैं, आज भारत का राष्ट्रीय चिह्न है। बौद्ध धर्म के इतिहास में गौतम बुद्ध के पश्चात् सम्राट अशोक का ही स्थान आता है।

दिव्यदान में अशोक की एक पत्‍नी का नाम 'तिष्यरक्षिता' मिलता है। उसके लेख में केवल उसकी पत्‍नी 'करूणावकि' है। दिव्यादान में अशोक के दो भाइयों सुसीम तथा विगताशोक का नाम का उल्लेख है।

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 06 Mar 2019 at 8:00 PM -

आरक्षण का रोस्टर

जब आरक्षण 100 में है तो रोस्टर 13 में कैसे बन गया?

13 बिंदु रोस्टर न्याय के नैसर्गिक सिद्धांतों की अवहेलना करके बनाया गया है।
रोस्टर का उद्देश्य किसी के न्यायाधिकारों का हनन नहीं बल्कि रक्षा करना है। ऐसी दशा में यह अब से कैसे लागू हो ... गया। इसे तब से ही लागू होना होगा जब से वर्तमान आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है।

रोस्टर में पहला पद उसको जाएगा जिसका आरक्षण अथवा अनाराक्षण प्रतिशत सर्वाधिक होगा।
उदाहरण के लिए
अनारक्षित 50
ओबीसी 27
Sc। 18
St। 5

पहली सीट पर अनारक्षित का हक 50% है इसलिए #अनारक्षित की
दूसरी सीट पर ओबीसी का हक 54% है इसलिए #ओबीसी की
तीसरी सीट पर अनारक्षित का हक 50% है इसलिए #अनारक्षित की
चौथी सीट पर sc का हक 72% है इसलिए #sc की
पांचवीं सीट पर अनारक्षित का हक आधा है इसलिए #अनारक्षित की
छठी सीट पर ओबीसी का हक 62% है इसलिए #ओबीसी की।
सातवीं सीट पर अनारक्षित का हक 50% है इसलिए #अनारक्षित की
आठवीं सीट पर sc का हक 44%है जो कि बाकी सबके हक से अधिक है इसलिए #sc की
नौवीं सीट पर पर अनारक्षित का हक 50% है इसलिए #अनारक्षित की
दसवीं सीट पर ओबीसी का हक 70% है इसलिए #ओबीसी की
ग्यारहवीं सीट पर पर st का हक 55% है इसलिए #st की
बारहवीं सीट पर अनारक्षित का हक 100% है इसलिए #अनारक्षित की।
तेरहवीं सीट पर ओबीसी का हक 51% तथा अनारक्षित का हक 50% इसलिए #ओबीसी की
अभी तक सबका हक बराबर नहीं हुआ तो ऐसी स्थिति में रोस्टर निर्धारण न्यायसंगत कैसे हुआ। इसे आगे बढ़ाया जाना और फिर इसी क्रम में लागू किया जाना जरूरी है।