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user image Arvind Swaroop Kushwaha - 09 May 2020 at 9:16 AM -

सनकी या मिशनरी

ये बामशाद नामके किसी धूर्त व्यक्ति ने झूठी जेनेटिक रिपोर्ट फैलाकर भारत का बड़ा नुकसान कर दिया।

देश में पढ़े लिखे मूर्खों की एक विशाल फौज खड़ी हो चुकी है जो किसी भी बात को अपने अनुकूल मानते ही दूसरों को मनवाने के लिए सनकियों की ... तरह लग जाती है।

इन सनकियों की मूर्खतापूर्ण पोस्ट और कमेंट रूपी कुतर्कों को पढ़-पढ़ कर इतना मानसिक क्षोभ उत्पन्न हो जाता है कि लगता है ऐसों को सीधे ब्लॉक ही कर दें। फिर जब यह विचार आता है कि "फेसबुक में तो ब्लॉक कर सकता हूँ लेकिन देश से तो नहीं निकाल सकता" तो किंकर्तव्यविमूढ़ सा उनके कुतर्कों के साथ माथा फोड़ने लगता हूँ।

पहले सनकियों की एक फौज ने धार्मिक अंधविश्वास फैला दिया और अब सनकियों की कुछ अन्य फौजें बामशाद की झूठी जेनेटिक रिपोर्ट का सूतियापा फैलाने में लगी रहती है। एक और फौज है जो यह सिद्ध करने में लगी रहती है कि "पूरा संविधान बाबा भीम ने अकेले बनाया और देश में जबरस्ती लागू कर दिया। संविधान भी ऐसा बनाया कि उसी से तुम जिंदा हो। उसी से तुम पढ़ लिख कर बोल पा रहे हो। उसी से तुम खा-हग पा रहे हो। आदि।"

इन सब सनकों में दुखद यह है कि ऐसे अधिकांश सनकी खुद तो औसत बुद्धि के हैं और बाकी दुनिया को अल्पबुद्धि वाला समझते हैं।

इनमें से ज्यादातर सनकी इंटर की फिजिक्स और मैथ्स के 80% सिद्धांत भी समझ नहीं पाते और अपने आपको बुद्धिमान इतना समझते हैं कि मुझ जैसे 100% सिद्धांतों को समझ सकने वाले इंसानों का ब्रेनवाश करने के लिए कुतर्क पर कुतर्क किये चले जाते हैं।

खैर जो भी हो मैं ऐसे सनकियों और मूढ़ों को ब्लॉक करना जारी रखूँगा, भले ही देश में रहते हुए वो अपने जैसे और सनकी मूढ़ तैयार करते रहें।

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 05 Apr 2020 at 8:29 AM -

हमारी आंतरिक सुरक्षा

एंटीबायोटिक, एंटीवायरल और वैक्सीन आखिर क्या फर्क है इनमें?

ये तो साफ़ है कि तीनों ही हमारे शरीर में घुसे घुसपैठियों के इलाज में काम आती हैं लेकिन घुसपैठियों के प्रकार और कार्यपद्धति के अनुसार इनमें कुछ भेद हैं। इनकी कार्यपद्धति और भेद को समझने के ... लिए पहले हम अपने इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र के बारे में कुछ बेसिक चीजें समझ लेते हैं।

हमारा इम्यून सिस्टम एक जबरजस्त रक्षा तंत्र है जो बहुत ही होशियारी से बाहरी खतरों से शरीर की रक्षा करता है। इस त्रिस्तरीय रक्षा तंत्र का पहला सुरक्षा घेरा है हमारी त्वचा और म्यूकस ग्रंथियां। त्वचा और म्यूकस न केवल घुसपैठियों के लिए एक दीवार का काम करते हैं बल्कि इनमें मौजूद हेल्दी बैक्टीरिया और रसायन कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया और फंगी से हमारी रक्षा करते हैं और इन्हें शरीर में घुसने से पहले ही नष्ट कर देते हैं। दूसरा सुरक्षा घेरा है नॉन स्पेसिफिक वाइट ब्लड सेल जो घुसपैठियों को घेरकर खा जाने के लिए कुख्यात हैं। तीसरा घेरा बाकी दो से तकनीकी रूप से उन्नत है और आर्मी के इंटेलीजेंस यूनिट जैसा है जो घुसपैठिये की पहचान करता है और खास रणनीति और हथियारों से उनसे निपटता है एकदम सर्जिकल स्ट्राइक की तरह। इस यूनिट के योद्धा हैं दो ख़ास किस्म में वाइट ब्लड सेल जिन्हें B-सेल और T-सेल के नाम से जानते हैं।

B-सेल की सतह पर मौजूद रिसेप्टर घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें मार्क करता जाता है ताकि सबको पता चल जाए दुश्मन कौन है। T-सेल का काम भी कुछ ऐसा ही है लेकिन फर्क बस इतना है कि ये घुसपैठियों के बजाये अपने ही शरीर के उन सेल्स को मार्क करता है जो संक्रमित हो चुके हैं ताकि उन्हें मिटाकर संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। एक बात जो इन दोनों सेल्स को सबसे ख़ास बनाती है वो ये कि एक बार किसी घुसपैठिये से भिडंत होने के बाद ये उस घुसपैठिये की हिस्ट्रीशीट तैयार कर लेते हैं ताकि अगली बार उसके घुसते ही उसे पहचानकर उसका काम तमाम किया जा सके।

तो ये तो बात हुयी हमारे इम्यून सिस्टम की। अब वापस आते हैं अपने सवाल पर। सबसे पहले बात करते हैं एंटीबायोटिक की। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है एंटी बायो यानी जीव रोधी। एंटीबायोटिक का काम है बैक्टीरिया को नष्ट करना। एंटीबायोटिक में मौजूद ख़ास केमिकल बैक्टीरिया को दो तरह से ख़त्म कर देते हैं, पहला उसकी मेम्ब्रेन को कमजोर कर और दूसरा कुछ ख़ास प्रोटीन का उत्पादन रोककर। लेकिन इस काम में कुछ लाभदायक बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं। हालाँकि एंटीबायोटिक इस तरह तैयार किये जाते हैं कि लाभदायक बैक्टीरिया को कम से कम नुकसान पहुंचे। एंटीबायोटिक से बैक्टीरिया जनित रोगों की तो रोकथाम की जा सकती है लेकिन वायरस पर ये बेअसर हैं।

वायरस चूँकि अपनी संख्या बढ़ाने के लिए हमारे ही सेल्स का इस्तेमाल करते हैं इसलिए उन्हें एंटीबायोटिक से नष्ट नहीं किया जा सकता। वायरस से निपटने के लिए कुछ ख़ास तरह की दवाएं विकसित की गयी हैं जिन्हें एंटीवायरल कहते हैं। एंटीवायरल वायरस के प्रजनन को धीमा कर इससे निपटती हैं। इनमें मौजूद केमिकल्स शरीर में उन कुछ ख़ास प्रोटीन्स के उत्पादन को कम कर देते हैं जो कि वायरस के निर्माण के लिए जरूरी हैं। लिहाजा इन प्रोटीन्स के आभाव में वायरस का रिप्रोडक्शन धीमा पड़ जाता है।

एंटीवायरल के निर्माण में चुनौती ये है कि इसके लिए वायरस में मौजूद उन प्रोटीन्स का पता होना जरूरी है जिनका उत्पादन कम होने से बाकी अंदरूनी शारीरिक गतिविधियों पर कोई फर्क न पड़े। वे वायरस जिनकी वैक्सीन अभी नहीं बनाई जा सकी है जैसे एड्स, हर्पीज, इन्फ्लूएंजा में एंटीवायरल ही एकमात्र इलाज है। ये एंटीवायरल दवाओं की ही मेहरबानी है कि कभी जानलेवा समझे जाने वाले एड्स के रोगी भी इन दवाओं के जरिये लम्बा जीवन जी पाते हैं। हालाँकि इन दवाओं से एड्स वायरस नष्ट तो नहीं होता लेकिन फिर भी इतना निष्प्रभावी हो जाता है कि रोगी सामान्य जीवन जी सकता है।

वैक्सीन के काम करने का ढंग इन दोनों प्रकार की दवाओं से एकदम जुदा है। वैक्सीन में सीधे तौर पर ऐसा कुछ नहीं होता जो घुसपैठियों को नष्ट कर सके। वैक्सीन एक तरीका है हमारे इम्यून सिस्टम को घुसपैठियों की पहचान कराने का। जैसा कि लेख के शुरू में मैंने बताया था कि B&T सेल घुसपैठियों से भिडंत होने पर उनकी हिस्ट्रीशीट तैयार कर लेते हैं ताकि अगली बार उसके शरीर में दाखिल होते ही पहचानकर उसका काम तमाम कर सकें। आपने शायद सुना भी होगा कि जिसको एक बार खसरा या चेचक हो जाए उसको जीवन में दोबारा कभी ये बीमारी नहीं होती। इसका कारण यही है कि हमारा इम्यून सिस्टम घुसपैठिये को अब पहचान चुका है। इम्यून सिस्टम के इसी गुण का उपयोग वैक्सीन बनाने के लिए किया जाता है।

वैक्सीन असल में निष्क्रिय वायरस बैक्टीरिया का मिश्रण है, जिनको शरीर में दाखिल किया जाता ताकि इम्यून सिस्टम इन घुसपैठियों की पहचान कर सके और भविष्य में यदि कोई सक्रीय घुसपैठिया दाखिल होता है तो उसको पहचानकर नष्ट कर सके। लेकिन वैक्सीन की भी कुछ सीमायें हैं। बहुत से वायरस ऐसे हैं जो तेजी से म्यूटेट करते हैं। ऐसे वायरसों के लिए वैक्सीन बनाना एक टेढ़ी खीर है। क्योंकि घुसपैठिया तेजी से अपनी पहचान बदलता जाता है। आप इम्यून सिस्टम को उसकी पहचान करा भी दें तो वह भेस बदलकर घुस आता है।

लेकिन बावजूद इसके वैक्सीन्स की खोज मानवजाति के लिए एक वरदान सिद्ध हुयी है। इनके कारण तमाम ऐसी बीमारियाँ जैसे खसरा, चेचक, पोलियो इत्यादि जो दुनिया भर में समय समय पर अपना कहर बरपाती थीं अब लुप्तप्राय हो चुकी हैं। वैक्सीन से होने वाला लाभ दोहरा है। ये न केवल जिसने इसे लगवाया है उसे सुरक्षा देती है बल्कि समुदाय में उस संक्रामक बीमारी के फैलने से रोकने में बैरियर का काम करती है। यही कारण है कि दुनिया भर की सरकारें टीकाकरण पर इतना जोर देती हैं।
Arpit Dwivedi

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 24 Dec 2018 at 8:09 AM -

‘दिमाग’ से जुड़े 35 ग़ज़ब रोचक तथ्य
1. अगर 5 से 10 मिनट तक दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाए तो यह हमेशा के लिए Damage हो सकता हैं.
2. दिमाग पूरे शरीर का केवल 2% होता हैं लेकिन यह पूरी बाॅडी का 20% खून और ... ऑक्सीजन इस्तेमाल कर लेता हैं.
3. हमारा दिमाग़ 40 साल की उम्र तक बढ़ता रहता हैं.
4. हमारे दिमाग के 60% हिस्से में चर्बी होती हैं इसलिए यह शरीर का सबसे अधिक चर्बी वाला अंग हैं.
5. सर्जरी से हमारा आधा दिमाग़ हटाया जा सकता हैं और इससे हमारी यादों पर भी कुछ असर नही पडेगा.
6. जो बच्चे पाँच साल का होने से पहले दो भाषाएँ सीखते है उनके दिमाग की संरचना थोड़ी सी बदल जाती हैं.
7. दिमाग की 10% प्रयोग करने वाली बात भी सच नही हैं बल्कि दिमाग के सभी हिस्सों का अलग-अलग काम होता हैं.
8. दिमाग़ के बारे में सबसे पहला उल्लेख 6000 साल पहले सुमेर में मिलता हैं.
9. 90 मिनट तक पसीने में तर रहने से आप हमेशा के लिये एक मनोरोगी बन सकते हो.
10. बचपन के कुछ साल हमें याद नही रहते क्योकिं उस समय तक “HIPPOCAMPUS” डेवलप नही होता, यह किसी चीज को याद रखने के लिए जरूरी हैं.
11. छोटे बच्चे इसलिए ज्यादा सोते हैं क्योंकि उनका दिमाग़ उनके शरीर द्वारा बनाया गया 50% ग्लूकोज इस्तेमाल करता हैं.
12. 2 साल की उम्र में किसी भी उम्र से ज्यादा Brain cells होती हैं.
13. अगर आपने पिछली रात शराब पीयी थी और अब आपको कुछ याद नही हैं तो इसका मतलब ये नही हैं कि आप ये सब भूल गए हो बल्कि ज्यादा शराब पीने के बाद आदमी को कुछ नया याद ही नही होता.
14. एक दिन में हमारे दिमाग़ में 70,000 विचार आते हैं और इनमें से 70% विचार Negative (उल्टे) होते हैं.
15. हमारे आधे जीन्स दिमाग़ की बनावट के बारे में बताते हैं और बाकी बचे आधे जीन्स पूरे शरीर के बारे में बताते हैं.
16. हमारे दिमाग की memory करीब 60 हजार GB अनुमानित है, फिर भी यह कंप्यूटर की तरह कभी नही कहेगा कि memory full हो गई.
17. अगर शरीर के आकार को ध्यान में रखा जाए तो मनुष्य का दिमाग़ सभी प्रणीयों से बड़ा है। हाथी के दिमाग का आकार उसके शरीर के मुकाबले सिर्फ 0.15% होता हैं बल्कि मनुष्य का 2%.
18. एक जिन्दा दिमाग बहुत नर्म होता है और इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता हैं.
19. जब हमे कोई इगनोर या रिजेक्ट करता हैं तो हमारे दिमाग को बिल्कुल वैसा ही महसूस होता हैं जैसा चोट लगने पर.
20. Right brain/Left brain जैसा कुछ नही हैं ये सिर्फ एक मिथ हैं. पूरा दिमाग़ इकट्ठा काम करता हैं.
21. चाॅकलेट की खूशबू से दिमाग़ में ऐसी तरंगे उत्पन्न होती हैं जिनसे मनुष्य आराम (Relax) महसूस करता हैं.
22. जिस घर में ज्यादा लड़ाई होती हैं उस घर के बच्चों के दिमाग पर कुछ-कुछ वैसा ही असर पड़ता हैं जैसा युद्ध का सैनिकों पर.
23. टी.वी. देखने की प्रक्रिया में दिमाग़ बहुत कम इस्तेमाल होता है और इसलिए इससे बच्चों का दिमाग़ जल्दी विकसित नहीं होता. 24. बच्चों का दिमाग़ कहानियां पढ़ने से और सुनने से ज्यादा विकसित होता है क्योंकि किताबों को पढ़ने से बच्चे ज्यादा कल्पना करते हैं.
24. हर बार जब हम कुछ नया सीखते है तो दिमाग में नई झुर्रियां विकसित होती हैं और यह झुरिया ही IQ का सही पैमाना हैं.
25. अगर आप खुद को मना ले कि हमने अच्छी नींद ली हैं तो हमारा मस्तिष्क भी इस बात को मान जाता हैं.
26. हमारे पलक झपकने का समय 1 सैकेंड के 16वें हिस्से से कम होता है पर दिमाग़ किसी भी वस्तु का चित्र सैकेंड के 16वें हिस्से तक बनाए रखता हैं.
27. हेलमेट पहनने के बाद भी दिमाग को चोट लगने की संभावना 80% होती हैं.
28. मनुष्य के दिमाग़ में दर्द की कोई भी नस नही होती इसलिए वह कोई दर्द नही महसूस नही करता.
29. एक ही बात को काफी देर तक tension लेकर सोचने से हमारा दिमाग कुछ समय के लिए सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता को खो देता हैं.
31. दिमाग तेज करने के लिए सिर में मेहंदी लगाए और दही खाए. क्योकिं दही में अमीनो ऐसिड होता हैं जिससे टेंशन दूर होती हैं और दिमाग़ की क्षमता बढ़ती हैं.
32. अगर आप अपने स्मार्टफ़ोन पर लम्बे समय तक काम करते हैं तब आपके दिमाग़ में ट्यूमर होने का खतरा बड़ जाता हैं.
33. अगर दिमाग़ से “Amygdala” नाम का हिस्सा निकाल दिया जाए तो इंसान का किसी भी चीज से हमेशा के लिए डर खत्म हो जाएगा.
34. Brain (दिमाग) और Mind (मन) दो अलग-अलग चीजे हैं वैज्ञानिक आज तक पता नही लगा पाए कि मन शरीर के किस हिस्से में हैं.
35. हमारे दिमाग़ में एक “मिडब्रेन डोपामाइन सिस्टम” (एमडीएस) होता है, जो घटने वाली घटनाओं के बारे में मस्तिष्क को संकेत भेजता हैं हो सकता की हम इसे ही अंतर्ज्ञान अथवा भविष्य के पूर्वानुमान कहते हैं. जिस व्यक्ति के दिमाग में यह सिस्टम जितना ज्यादा विकसित होता है वह उतनी ही सटीक भविष्यवाणी कर सकता हैं.
Q. दिमाग तेज करने का सबसे आसान उपाय ?
Ans. दिमाग तेज करने का सबसे आसान उपाय हैं, जमकर पानी पाएँ। 1 गिलास पानी पीने से दिमाग 14% तेजी से काम करता हैं. जब तक प्यास शांत नही होती तब तक मनुष्य के दिमाग को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती हैं.

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 10 Dec 2018 at 5:10 AM -

विटामिन ई

विटामिन ई यौगिकों के एक समूह का द्योतक है जिसमें टोकोफेरॉल और टोकोट्रॉयनॉल दोनों निहित हैं। यह खून में रेड ब्लड सेल या लाल रक्त कोशिका (Red Blood Cell) को बनाने के काम आता है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगों (जैसे कि मांस-पेशियां व ... अन्य कोशिकाएँ) को सामान्य रूप में बनाये रखने में मदद करता है। यह शरीर को ऑक्सीजन के एक नुकसानदायक रूप से बचाता है, जिसे ऑक्सीजन रेडिकल्स (oxygen radicals) कहते हैं। इस गुण के कारण विटामिन ई को एंटीओक्सिडेंट (anti-oxidants) कहा जाता है। विटामिन ई, सेल के अस्तित्व बनाये रखने के लिये आवश्यक उसके बाहरी कवच या सेल मेमब्रेन को बनाए रखता है। विटामिन ई, शरीर के फैटी एसिड को भी संतुलन में रखता है।

समय से पहले पैदा हुए या प्रीमेच्योर नवजात शिशु (Premature infants) में, विटामिन ई की कमी से खून की कमी हो जाती है। इससे उनमें रक्ताल्पता या एनेमिया (anemia) हो सकता है। बच्चों और व्यस्क लोगों में, विटामिन ई के अभाव से, दिमाग की नसों की न्युरोलोजीकल (neurological) समस्या हो सकती है। अत्यधिक विटामिन ई लेने से खून की सेलों पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे कि खून बहना या कोई अन्य बीमारी होना मुमकिन है।

विटामिन ई की कमी से मांशपेशियों की शक्ति क्षीण हो जाती है।

यह ताजे फलों, सब्जियों और अंकुरित बीजों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

शारीरिक कमजोरी महसूर होने, थकान होने या शरीर मुरझाया सा होने की दशा में भोजन के रूप में विटामिन ई की पर्याप्त मात्रा ली जानी चाहिए।

user image Aneeeh Swaroop

Nice

Thursday, December 13, 2018
user image Arvind Swaroop Kushwaha - 07 Nov 2018 at 5:31 PM -

अंडा खाने के फायदे

हर रोज अंडे का सेवन बना सकता है आपको तंदुरुस्त। प्रोटीन, विटामिन और अन्य पोषक तत्वों जैसे कॉपर, पोटेशिम और कैल्शियम आदि की प्रचुर मात्रा से भरपूर अंडा आपकी सेहत को तो सुधारने में मदद करता ही हैं साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य को भी ... बेहतर रखता है।
कुछ बेहतरीन सूपरफूड्स में से एक अंडा अनेक पोषक तत्वों से भरपूर आहार है।
अंडा खाने से आपका स्वास्थ्य बेहतर, मस्तिष्क तेज तथा शरीर फिट और मजबूत बनता है। हर रोज नाश्ते में अंडा खाने से वजन घटाने में भी मदद मिलती है क्योंकि इसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। अंडे को एक संतुलित आहार के रूप में जाना जाता है। आइए आपको बताते हैं कि इसे सूपरफूड क्यों माना जाता है और इसके स्वास्थ्य लाभ क्या हैं।
अंडे में पाएं जाने वाले पोषक तत्व-
अंडे को बेहतरीन सूपरफूड्स में से एक इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसमें अत्यधिक पोषक तत्व जैसे विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन पाएं जाते हैं।

अंडे में निम्न तत्वों की प्रचुर मात्रा होती है-

प्रोटीन
कैल्शियम
फास्फोरस
आयरन
मैग्नीशियम
जिंक
सोडियम
विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन डी और विटामिन ई
कॉपर
पोटेशियम 

अंडे से होने वाले स्वास्थ्य लाभ: अंडे का हर रोज उचित मात्रा में सेवन करके आप निम्न स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं।
आयरन की कमी के कारण कई लोग थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन आदि लक्षणों का अनुभव करते हैं। इसकी कमी से एनीमिया बीमारी भी हो सकती है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर तरीके से कार्य करने के लिए आयरन बेहद जरुरी है। अंडे के पीले भाग में आयरन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से आयरन की कमी की समस्या को कम किया जा सकता है।
अंडा बैड कोलेस्ट्रोल को नहीं बढ़ाता है: अधिकतर लोगों को ये गलत धारणा है कि अंडे के सेवन से आपके शरीर में बैड कोलेस्ट्रोल बढ़ जाता है क्योंकि इसमें 210 मिग्रा कोलेस्ट्रोल कन्टेंट पाया जाता है। हालांकि ये धारणा गलत है। अंडे का सेवन करने से आपके शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर नहीं बढ़ता है बल्कि यह गुड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है।
अंडे के सेवन से वजन कम होता है:
अध्ययनों में यह पता लगाया गया है कि अगर आप दिन की शुरुआत अंडे के साथ करते हैं तो आप दिनभर उर्जावान रहते हैं। नाश्ते में अंडे का सेवन करने से वजन कम करने में मदद मिलती हैं। अंडे में प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है जिससे यह आपको भूख कम लगने देता है और आप कम खाते हैं और आपका वजन नियंत्रित रहता है।
अंडा हड्डियों को मजबूत बनाता है:
अंडे में विटामिन डी की अच्छी मात्रा होती है। विटामिन डी का प्रचुर मात्रा में सेवन करने से आपका शरीर कैल्शियम का अवशोषण अच्छे से कर पाता है। जिसके चलते आपकी हड्डियां स्वस्थ रहती हैं और मजबूत होती हैं। साथ ही नई बोन सेल्स के निर्माण में मदद मिलती है।
अंडा और दिमागी विकास: 
अंडे में कोलिन मौजूद होता है। कोलिन एक पोषक तत्व है जो ब्रेन सेल्स के निर्माण में मदद करता है। इसके सेवन से आपका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। गर्भवती महिला अगर अंडे का सेवन करती हैं तो बच्चे का दिमागी विकास अच्छे से हो पाता है।

user image Jigyasa Editor

उपयोगी जानकारी

Wednesday, November 7, 2018