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user image Arvind Swaroop Kushwaha - 29 Oct 2018 at 2:31 PM -

श्रावस्ती का इतिहास

आइये आज एक नये नगर के इतिहास के बारे में कुछ जानकारी शेयर की जाय❗️ श्रावस्ती कोशल का एक प्रमुख नगर था❗️ तथागत गौतम बुद्ध जी के जीवन काल में यह कोशल देश की राजधानी थी❗️ बुद्धकालीन भारत के 6 महानगरों मे श्रावस्ती भी था,लगभग ... 500 ई.पूर्व❗️

भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के गोंडा-बहराइच जिलों की सीमा पर यह बौद्ध विहार स्थान है❗️ गोंडा-बलरामपुर से 12 मील पश्चिम में आधुनिक सहेत-महेत गांव ही श्रावस्ती है❗️ पहले यह कौशल देश की दूसरी राजधानी थी, श्रावस्ती बौद्ध का विहार स्थान है, तथागत श्रावस्ती में रहे थे, यहाँ के श्रेष्ठी अनाथपिण्डिक ने तथागत बुद्ध जी के लिये जेतवन बिहार बनवाया था, यहाँ बौद्ध मठ और विहार है❗️
श्रावस्ती कोशल का एक प्रमुख नगर था❗️ तथागत बुद्ध जी के जीवन काल में यह कोशल देश की राजधानी थी❗️ बुद्धकालीन भारत के 6 महानगरों मे श्रावस्ती भी था❗️लगभग 500 ई.पूर्व❗️

यह बुद्धकालीन नगर था, जिसके भग्नावशेष उत्तर प्रदेश राज्य के, बहराइच एवं गोंडा जिले की सीमा पर, राप्ती नदी के दक्षिणी किनारे पर फैले हुए हैं❗️

इन भग्नावशेषों की जाँच सन्‌ 1862-63 में जेननरल कनिंघम ने की और सन्‌ 1884-85 में इसकी पूर्ण खुदाई डॉ॰ डब्लू. हुई (Dr. W. Hoey) ने की❗️ इन भग्नावशेषों में दो स्तूप हैं जिनमें से बड़ा महेत तथा छोटा सहेत नाम से विख्यात है❗️ इन स्तूपों के अतिरिक्त अनेक विहार और भवनों के भग्नावशेष भी मिले हैं❗️ खुूदाई के दौरान अनेक उत्कीर्ण मूर्तियाँ और पक्की मिट्टी की मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं, जो नमूने के रूप में प्रदेशीय संग्रहालय (लखनऊ) में रखी गई हैं❗️ यहाँ संवत्‌ 1176 या 1276 (1119 या 1219 ई.) का शिलालेख मिला है, जिससे पता चलता है कि बौद्ध धम्म् इस काल में प्रचलित था❗️ बौद्ध काल के साहित्य में श्रावस्ति का वर्णन अनेक बार आया है और तथागत बुद्ध ने यहाँ के जेतवन में अनेक चातुर्मांस व्यतीत किए