Home

Welcome!

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 16 May 2020 at 7:39 AM -

दिल की बीमारियां

अगर आपको भी है दिल की बीमारी तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

अगर आप इस बीमारी को होने से रोकना चाहते हैं या फिर अगर आपको ये बीमारी हो गई है ये घरेलू नुस्खे आपको स्वस्थ्य रखने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं।


मौजूदा समय में ... जिस बीमारी के कारण सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो रही है वो है दिल की बीमारी। कई बार लोगों को इस बीमारी का पता भी नहीं चल पाता और उनकी मौत हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि शुरू से ही इस बीमारी को होने से रोक दिया जाए। अगर आप इस बीमारी को होने से रोकना चाहते हैं या फिर अगर आपको ये बीमारी हो गई है ये घरेलू नुस्खे आपको स्वस्थ्य रखने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं।


ये हो सकती हैं दिल की बीमारियां

1. परिहार्दिक सूजन : इस बीमारी के कारण हमारे दिल की झिल्ली में सूजन आ जाती है जिसके कारण हमारे दिल में हल्का-हल्का दर्द होने लगता है। इसके साथ ही इसके कारण हमारी नर्व्स भी तेज़ चलने लगती है। सिर्फ इतना ही नहीं, इस बीमारी के कारण कई बार दिल की झिल्ली में पानी भी भर जाता है और बुखार भी आ जाता है।


2. दिल की मांसपेशी फैल जाना : कई बार दिल की मांसपेशियों के ज्यादा काम करने के कारण ये मांसपेशियां फैल जाती हैं और बीमारी का रूप ले लेती हैं। इस बीमारी के होने से अकसर मरीज़ को हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी बनी रहती है।


3. रक्तगांठ बनना : इस बीमारी में मरीज़ की रक्त धमनियों में कैल्शियम, कोलेस्ट्रोल और फैट की परत जमने लगती है जो कि एक बीमारी का रूप ले लेती है।


4. आमवातिक ह्रदय रोग : ये बीमारी हड्डी की जोड़ों में बुखार होने से होती है। इस बुखार से हड्डी के जोड़ और दिल के वॉल्व सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और इनमें खराबी आ जाती है। ये बीमारी सबसे ज्यादा 5-15 साल के बच्चों में पाई जाती है।


5. वॉल्वूलर हार्ट डिजीज :कभी कभी किन्हीं वजहों से हार्ट के वॉल्व में होने वाला रक्त का रिसाव होने लगता है जिसकी वजह से वॉल्व का डैमेज हो सकता है। इसे वॉल्वूलर हार्ट डिजीज कहते हैं।


ये हैं दिल की बीमारी के लक्षण


अगर आपको नीचे दिये गए लक्षण में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि ये लक्षण दिल की बीमारी का इशारा हो सकते हैं।


1. सीने में असहज महसूस करना- अगर आपको सीने में दबाव महसूस हो या फिर दर्द महसूस हो तो ये आर्टरी ब्लॉक का भी संकेत हो सकता है।


2. नॉशिया, हार्टबर्न और पेट में दर्द- कई बार मितली आना, सीने में जलन, पेट में दर्द और पाचन संबंधी दिक्कतें दिल की बीमारी का संकेत हो सकती हैं।


3. हाथ में दर्द होना- कई बार दिल के मरीज़ों को सीने में और बाएं कंधे में दर्द की शिकायत होने लगती है।


4. ज्यादा समय के लिए कफ होना- अगर आपको सर्दी-जुकाम होने के साथ-साथ ज्यादा समय के लिए कफ की समस्या होती है तो ये दिल की बीमारी भी हो सकती है।


5. ज्यादा पसीना आना- अगर आपको सामान्य से ज्यादा पसीना आता है तो ये दिल के खतरे की तरफ इशारा हो सकता है।

ये घरेलू इलाज रखेंगे दिल की बीमारी से दूर

अगर आप किसी भी तरह की दिल की बीमारी का शिकार नहीं बनना चाहते हैं तो ये घरेलू नुस्खे अपनाए। इससे आप दिल की बीमारी से तो दूर रहेंगे ही, इसके साथ ही आप स्वस्थ्य भी रहेंगे।


1. आप फैटी भोजन से बचें। यदि जरूरी लगे खाने में सरसों के तेल का इस्तमाल करें। इससे आप फैटी एसिड से दूर रहेंगे जो कि दिल की बीमारी के जोखिम को 70 प्रतिशत तक कम कर देता है।


2. रोज़ सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से पूरे शरीर में खून का संचार सही तरीके से होता है। इसके साथ ही इससे हमारा दिल मज़बूत बनता है और इससे कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है।


3. रोज़ाना एक चम्मच शहद खाने से दिल की बीमारियां दूर रहती हैं।


4. आंवले का मुरब्बा भी दिल की बीमारी को दूर रखने में काफी मदद करता है।


5. सेब का जूस हमारे दिल को काफी हेल्दी बनाता है और साथ ही दिल की बीमारियों को दूर रखता है।

6. नियमित रूप से परिश्रम करें। परिश्रम करने का अवसर न मिले तो कसरत और व्यायाम करें।

user image Pramod Sharma - 13 May 2020 at 10:27 AM -

सुबह खाली पेट लहसुन खाने के होते हैं ये 5 फायदा

सुबह खाली पेट लहसुन खाने के होते हैं ये 5 फायदा
लहसुन
लहसुन खाने के अनेक फायदे है। आयुर्वेद में तो लहसुन को औषधि माना गया है। कहा जाता है कि किसी न किसी रूप में लहसुन को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। लेकिन ... सुबह-सवेरे खाली पेट लहसुन खाने के बहुत फायदे होते है। आइए जानते हैं।
1. हाई बीपी से छुटकारा
लहसुन खाने से हाई बीपी में आराम मिलता है। दरअसल लहसुन ब्‍लड सर्कुलेशन को कंट्रोल करने में काफी मददगार है। हाई बीपी की समस्‍या से जूझ रहे लोगों को रोजाना लहसुन खाने की सलाह दी जाती है।
2. पेट की बीमारियां छूमंतर
पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे डायरिया और कब्‍ज की रोकथाम में लहसुन बेहद उपयोगी है। पानी उबालकर उसमें लहसुन की कलियां डाल लें। खाली पेट इस पानी को पीने से डायरिया और कब्‍ज से आराम मिलेगा।
3. दिल रहेगा सेहतमंद
लहसुन दिल से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है। लहसुन खाने से खून का जमाव नहीं होता है और हार्ट अटैक होने का खतरा कम हो जाता है।
4. डाइजेशन होगा बेहतर
खाली पेट लहसुन की कलियां चबाने से आपका डाइजेशन अच्‍छा रहता है और भूख भी खुलती है।
5.सर्दी-खांसी में राहत
लहसुन खाने से सर्दी-जुकाम, खांसी, अस्‍थमा, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस के इलाज में फायदा है।

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 13 May 2020 at 8:47 AM -

मौत का तराजू

कोविड-19 के गम्भीर और मृतप्राय रोगी किस तरह से अन्य संक्रमित लोगों से अलग हैं ?

वर्तमान कोविड-19 पैंडेमिक में किसी भी वय अर्थात आयु, लिंग, नस्ल, धर्म, जाति का व्यक्ति इस विषाणु से संक्रमित हो सकता है, पर गम्भीर समस्या होने की आशंका उन्हें अधिक ... है, जो बड़ी उम्र के हैं अथवा जो किसी गंभीर रोग से ग्रस्त हैं। ये ही वे लोग हैं, जिनमें मृत्यु-दर भी अधिक पायी जा रही है। ऐसे में यह सोचना स्वाभाविक है कि किसलिए सार्स-सीओवी- 2 विषाणु से संक्रमित होने पर वृद्धों व दीर्घकालिक या गंभीर रोगग्रस्त लोगों में ऐसा देखने को मिल रहा है।

एक ऐसे तराजू की कल्पना करिए जिसका एक पलड़ा दूसरे से बस थोड़ा ही हल्का है। सब्ज़ी-इत्यादि तौलते समय आपने ऐसी स्थिति अक्सर देखी होगी, जब एक किलो का बाट सब्ज़ीवाला एक पलड़े पर रखता है और दूसरे पलड़े में कोई सब्ज़ी ( मान लीजिए टमाटर ) होती है। दोनों पलड़ों की बराबरी की स्थिति लगभग आ चुकी है : बस थोड़ा सा अन्तर रह गया है। टमाटर वाला पलड़ा बाट वाले पलड़े से थोड़ा ही ऊपर है। तभी सब्ज़ीवाला एक छोटा टमाटर उठाता है और उसे टमाटर वाले पलड़े में रख देता है। बस ! तुरन्त टमाटर वाला पलड़ा नीचे आता है और दोनों पलड़े या तो बराबर हो जाते हैं या फिर सब्जी वाला पलड़ा नीचे चला जाता है। सब्जी एक किलो पूरी हो गयी यानी जिंदगी पूरी हो गयी।

जीवन को सब्ज़ी के इस सौदे-सा समझने का प्रयास कीजिए। जीवित व्यक्ति का टमाटर वाला पलड़ा हल्का है। जिसका जितना यह हल्का , उतना वह स्वस्थ। बच्चों और युवाओं में यह पलड़ा अमूमन हल्का रहा करता है। लगभग पैंतीस, चालीस या कई बार पैंतालीस की उम्र तक। फिर कोई-न-कोई रोग जीवन में लगने लगता है जैसे कि लकड़ी में दीमक। शोध बताते हैं कि पैंतालीस की वय तक आते-आते ढेरों लोगों ( लगभग 25 % ) में कम-से-कम एक दीर्घकालिक रोग लग जाता है, चाहे वह डायबिटीज़ हो, हायपरटेंशन हो अथवा फिर इस्कीमिक हार्ट डिज़ीज़। ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती है, दूसरे दीर्घकालिक रोग भी व्यक्ति के शरीर से चिपकने लगते हैं। साठ की वय तक आते-आते लगभग 50% लोग दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। पचहत्तर की वय तक यह प्रतिशत 75 % के क़रीब पहुँच जाता है। जितनी अधिक उम्र, उतनी अधिक दीर्घकालिक ( क्रॉनिक ) बीमारी की आशंका। बड़ी उम्र के लोगों में एक या एक-से-अधिक क्रॉनिक बीमारी बहुधा देखने को मिलती हैं।

बढ़ती उम्र के साथ, दीर्घकालिक रोगों के साथ, धूमपान व मदिरापान के कारण तराजू का सौदे वाला पलड़ा धीरे-धीरे झुकता जा रहा है। वह बाट वाले पलड़े से बराबरी की ओर बढ़ रहा है। बस तभी कोविड-19 उस छोटे टमाटर की तरह उस पलड़े में आ जाता है और दोनों पलड़े सन्तुलित हो जाते हैं। यही मृत्यु है।

सौदे वाले पलड़े का नित्य भारी होते जाना दरअसल शरीर में इन्फ्लेमेशन नामके प्रक्रिया का नित्य बढ़ते जाना है। बढ़ती उम्र और दीर्घकालिक रोग मानव-शरीर में एक इन्फ्लेमेशन की स्थिति पैदा करते जाते हैं। स्वस्थ युवा व्यक्ति की तुलना में वृद्धों और दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त लोगों में कोशिकाएँ ज्यादा मरती हैं और कम बनती हैं और प्रतिरक्षा-तन्त्र उनके शवों व उनसे निकले रसायनों का निस्तारण करने में ही लगे रहते रहते हैं। इन कोशिका-शवों का निस्तारण कम ज़रूरी मत समझिए : यह काम कीटाणुओं को मारने से कम आवश्यक नहीं है।

शवों को निस्तारित न किया जाए, तो क्या होगा? दुर्गन्ध फैलने से स्थिति का बिगाड़ शुरू होगा और बीमारियों तक जाएगा। शरीर के भीतर मृत-मृतप्राय कोशिकाओं व उनसे निकल रहे रसायनों के कारण ही इन्फ्लेमेशन का जन्म होता है। यह शरीर के भीतर होगा। अगर मृत कोशिकाओं के शरीरों का 'उचित अन्तिम संस्कार' नहीं किया गया अर्थात मृत या मृतप्राय कोशिकाओं से निकल रहे रसायनों को रोका जाएगा।

जब तक कोशिकीय स्तर पर चल रहा यह आपदा-काल समाप्त किया जाएगा। शरीर में पुरानी के स्थान पर नयी कोशिकाएँ जन्म लेंगी। कोशिका-शवों का त्वरित निस्तारण होगा , तभी तक शरीर की स्वास्थ्यपरक स्वच्छता बनी रहेगी।

बढ़ती उम्र के साथ कोशिकाओं का बूढ़ा होना और मरना नित्य बढ़ता जाता है। धूमपान करने वाले के शरीर की कोशिकाएँ भी सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक तेज़ी से मर रही होती हैं। अनिद्रा व तनाव भी यही करते हैं । प्रदूषण भी। दीर्घकालिक रोग भी कोशिका-मरण बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाते हैं। इससे पैदा हुई इन्फ्लेमेशन की स्थिति एक ऐसे देश की तरह होती है, जहाँ एक आपदा की तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। तराज़ू का टमाटरी पलड़ा लगातार बाट वाले पलड़े की ओर झुक रहा है।

तभी सार्स-सीओवी 2 का शरीर में प्रवेश होता है। उस शरीर में जो वृद्ध है अथवा दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त है। इस शरीर के भीतर के प्रतिरक्षक सैनिक सालों से लड़ते रहे हैं। पूरे शरीर में इन्फ्लेमेशन की स्थिति सालों से रहती आयी हैं ; चारों ओर मृत-मृतप्राय कोशिकाओं के ढेर रोज़ लगते रहते हैं और उनसे लगातार आपदा-कालीन रसायन निकलते रहते हैं। अब इस थके बोझिल ऊबे-उकताये प्रतिरक्षा-तन्त्र को इस नये विषाणु-शत्रु से जूझना पड़ जाता है। वह जूझता भी है , पर इस मारामारी में इन्फ्लेमेशन का स्तर इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति की जान निकल जाती है। विषाणु ही सीधे-सीधे कोविड-रोगी को नहीं मारता , विषाणु और प्रतिरक्षक कोशिकाओं की लड़ाई में शरीर मारा जाता है। मित्र और शत्रु लड़ते हैं , जान व्यक्ति की जाती है।

इन्फ्लेमेशन पैदा करने वाली स्थितियाँ अगर टमाटर हैं , तो सार्स-सीओवी 2 तराज़ू बराबर करने के लिए जोड़ा गया अन्तिम छोटा टमाटर। बहुत हल्के टमाटरी पलड़े में विषाणु के छोटे टमाटरी इन्फ्लेमेशन से तराज़ू के पलड़े बराबर होने की उम्मीद बहुत कम है। इसलिए स्वस्थ रहने का अर्थ टमाटर-रूपी इन्फ्लेमेशन को पलड़े में कम-से-कम रखना है। बढ़ती उम्र का कुछ कर नहीं सकते , प्रदूषण भी सामूहिक प्रयासों से ही जाएगा। लेकिन धूमपान न करें , यह सम्भव है। मदिरापान से यथासम्भव दूरी रखें , यह भी। डायबिटीज़ और ब्लडप्रेशर की रोकथाम के लिए सन्तुलित भोजन , सम्यक् निद्रा , तनावमुक्ति व व्यायाम नित्य करें। ( बाक़ी कुछ टमाटर मानव के बुरे जीन भी हैं , उनका हम कुछ कर नहीं सकते। वे हमें माँ-बाप से तराज़ू के अपने पलड़े में विरासत में मिले हैं। )

विषाणु आएगा , देह-तुला का पलड़ा हल्का ही रहेगा। तुला सन्तुलित न हो सकेगी , जीवन चलता रहेगा। मृत्यु का सौदा टल जाएगा।

--- स्कन्द।

( पुनश्च : लेख में टमाटर केवल लाक्षणिक प्रतीक है इन्फ्लेमेशन पैदा करने वाली स्थितियों का। टमाटर व सब्ज़ियों-फलों के वास्तविक सेवन से शरीर का इन्फ्लेमेशन कम होता है , इनमें अनेक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद रहते हैं। स्वस्थ लोग लगातार पौष्टिक भोजन लेते रहें और बीमार अपने डॉक्टरों से पूछकर आहार-विषयक निर्णय लें। )

#skandshukla22

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 11 May 2020 at 7:54 AM -

vitamin E के ये 10 फायदे

Skin Care : जानिए vitamin E के ये 10 फायदे

आपने विटामिन-ई के बारे में कई बार सुना होगा और पढ़ा भी होगा। कई फलों, तेलों और ड्राय फ्रूट्स में विटामिन-ई पाया जाता है, और यह सेहत के साथ-साथ सौंदर्य के लिए भी बेहद लाभदायक होता ... है।  खासतौर पर सोयाबीन, जैतून, तिल के तेल, सूरजमुखी, पालक, ऐलोवेरा, शतावरी, ऐवोकेडो के अलावा कई चीजों में वि‍टामिन-ई की मात्रा मौजूद होती है। जानिए विटामिन ई के  ऐसे ही 10 लाभ - 

 

1.बेहतरीन क्लिंजर -विटामिन-ई का उपयोग कई तरह के सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। इसका अहम कारण है, कि यह एक बेहतरीन क्लिंजर है, जो त्वचा की सभी परतों पर जमी गंदगी और मृत कोशिकाओं की सफाई करने में सहायक है।

 

2.आरबीसी निर्माण - शरीर में रेड ब्‍लड सेल्‍स यानि लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण करने में विटामिन-ई सहायक है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान विटामिन- ई का सेवन बच्‍चे को एनीमिया यानि खून की कमी से बचाता है।

 

3.मानसिक रोग - एक शोध के अनुसार विटामिन-ई की कमी से मानसिक रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। शरीर में विटामिन-ई की पर्याप्‍त मात्रा मानसिक तनाव और अन्य समस्‍याओं को कम करने में मदद करती है।

 

4.एंटी एजिंग -  विटामिन-ई में भरपूर एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर को कम करते हैं। इसके अलावा यह झुर्रियों को भी कम करने और रोकने में बेहद प्रभावकारी है।

 

5.हृदय रोग - शोध के अनुसार जिन लोगों के शरीर में विटामिन ई की मात्रा अधिक होती है, उन्हें दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। यह मेनोपॉज के बाद महिलाओं में होन वाले हार्ट स्ट्रोक की संभावना को भी कम करता है।

 

6.प्राकृतिक नमी - त्वचा को प्राकृतिक नमी प्रदान करने के लिए विटामिन-ई बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा यह त्वचा में कोशिकाओं के नवनिर्माण में भी सहायक है।

 

7.यूवी किरणों से बचाव -सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने में विटामिन-ई महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सनबर्न की समस्या या फोटोसेंसेटिव होने जैसी समस्याओं से विटामिन-ई रक्षा करता है।

 

8.विटामिन-ई का प्रयोग करने पर अल्जाइमर जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है, इसके अलावा यह कैंसर से लड़ने में भी आपकी मदद करता है। एक शोध के अनुसार जिन लोगों को कैंसर होता है, उनके शरीर में विटामिन-ई की मात्रा कम होती है।

 

9.विटामिन ई की पर्याप्त मात्रा डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद करती है। यह ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम, इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ एलर्जी से बचाव में भी उपयोगी होता है।

 

10.यह कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करता है और शरीर में वसीय अम्लों के संतुलन को बनाए रखने में सहायता करता है। इसके साथ ही यह थायराइड और पिट्यूटरी ग्रंथि‍ के कार्य में होने वाले अवरोध को रोकता है।

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 30 Apr 2020 at 9:10 PM -

कैंसर, cancer

भारत मे कुल 84 लाख के आसपास मौतें हर साल होती हैं। कैंसर से मरने वालों की संख्या कुल मौतों का 13 प्रतिशत है। इस हिसाब से हर साल 10 लाख से भी ज्यादा लोग कैंसर से मरने को विवश हैं। और 10 लाख से ... अधिक नए लोग इसमे जुड़ते जाते हैं। कैंसर के इलाज के लिए जो अस्पताल बनाए गए हैं, उनमें साधन कम हैं, वेटिंग लिस्ट बहुत लंबी हैं। बीमार कई बार स्ट्रेचर पर ही दम तोड़ जाते हैं।

आमतौर पर कहीं दर्द होने पर हल्की फुल्की दवाइयां लेकर लोग काम चला लेते हैं। श्वेता जब बनारस आई थी तो उसी समय एक बार तौसीफ़ के यहाँ से कपड़े लेकर आते समय व रास्ते में कुछ काम पड़ जाने के बाद मेरे सिर में बहुत तेज दर्द होने लगा था। हालांकि ऐसा दर्द चार छह दिन में अमूमन हो जाता था। लेकिन इस बार मुकेश ने सेरेडॉन लाकर दिया और कुछ ही देर में हमें आराम हो गया था। तबसे मैं इस दवा को हमेशा अपने पास रखने लगा। जब भी दिक्कत होती खा लेता। इससे पहले ग्रेजुएशन के दिनों में पैरासिटामॉल का आदती हो गया था, यह आदत मास्टर्स तक बनी रही। अभी भी कॉलपोल हमारे बैग में पड़ी रहती है। चार छह दिन में एकाध बार असहनीय सिरदर्द अभी भी हो जाता है। सेरेडॉन तो मिल नहीं पाई, लेकिन हरारत होने पर कॉलपोल खा लेता हूँ।

खैर, इसमें से अधिकतर लोग इलाज नही करवा पाते क्योंकि कैंसर का मुकम्म्मल इलाज 12 से 15 लाख के बीच पड़ता है। यदि कैंसर इन्फेक्टेड पार्ट शरीर से निकाल देने का कोई विकल्प है तो मरीज के स्वस्थ होने की संभावना बची रहती है अन्यथा तीसरी स्टेज के 60 प्रतिशत रोगी एक बार ठीक होकर जल्द फिर से चपेट में आ जाते हैं। 40 प्रतिषत की मृत्यु पहले इलाज के दौरान ही हो जाती है क्योंकि कीमोथेरेपी को बर्दाश्त करना हर बॉडी के बस का नही है। चौथी स्टेज पर 10 प्रतिशत मरीज ही बच पाते हैं।

यह समय कोरोना काल है। कुल 30 लाख इन्फेक्टेड लोगों मे से 10 लाख लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं जो मीडिया नही बताता। तमाम अमीर औऱ साधन संपन्न लोग बचा लिए गए हैं। फिर भी संसार बाकी तमाम काम रोककर कोरोना वैक्सीन खोजने में लगा है। कोरोना जिस दिन कैंसर की तरह इकॉनमी बूस्टर बीमारी बन जाएगी, यह समाचारों से गायब हो जाएगी। हमें यह बता दिया जाएगा कि कोरोना अब उतना घातक नहीं है। कैंसर, दमा, एड्स, डेंगू, हेपिटाइटिस बी से भी तो मरते हैं न लोग। लेकिन सरकार को भारी टैक्स और आमदनी देकर मरते हैं। लेकिन दवाई उद्योग को बड़ा करके मरते हैं। दवा उद्योग एक उद्योग है, और उद्योग अपने फ़ितरत में ही बेईमान होता है। ऐसे में कैंसर के इलाज के शोध करके कोई सस्ता इलाज नहीं निकाल सकता। बीमा कम्पनियां कैंसर पीड़ित का स्वास्थ्य बीमा नही करतीं।

अभी पिछले दिनों बिहार के भभुआ से सासाराम गई हुई जिस मुस्लिम महिला को कोरोना पॉज़िटिव बताया गया था, और सोशल मीडिया वालों ने इसमें इवेंट खोज लिया था। उसकी पूरी कहानी जानेंगे तो पैरों तले से धरती खिसक जाएगी। दो साल हुए, उन महिला को कैंसर हो गया है। पटना के अस्पताल में उन्हें 12 साल बाद की तारीख़ दी गई है। ग़रीब परिवार है, इधर-उधर की दुकानों से दवाई लेकर किसी तरह से अपने दर्द को काबू में रखने और मजूरी करने का काम करती हैं। इधर लॉकडाउन में उनके परिवार की हालत क्या हुई होगी, इसकी कल्पना करें आप। ऐसे में खाने के लिए काम की तलाश में निकली थीं और जिनके भी संपर्क में आई हों, परिणाम आपके सामने है। आप सरकार के पक्ष-विपक्ष में होकर अपनी सुविधानुसार इवेंट का हिस्सा बन कर ख़ुश हैं।

जब खाने को शुद्ध भोजन, पीने को शुद्ध पानी और शुद्ध हवा नहीं मिलेगी तब कैंसर आपको नहीं होगा तो किसे होगा। जहरमुक्त भोजन,पानी, हवा के लिए हमने सरकार पर कभी दबाव नहीं बनाया, कभी इसके लिए पूंजीपतियों के ख़िलाफ़ मोर्चे नहीं खोले। किस तरीके से दूसरे विश्व युद्ध के बाद से योजनाबद्ध रूप में जनता को जहर खाने, जहर पीने और जहर के बीच में रहने को अभ्यस्त कर दिया गया है। हमें इसकी भनक तक नहीं लगी। जिन हथियार कम्पनियों ने लाखों लोगों की ज़िंदगी की कीमत पर अपने फ़ायदे कमाया था। उन्ही केमिकल का प्रयोग कीटाणुनाशक और फफूंदनाशक जैसी दवाओं को बनाने में किया जाने लगा। भारत में इसके लिए सबसे पहले सहारा लिया गया हरित क्रांति जैसी चीज का। इसे आज भी ग्लैमराइज करके परोसा जाता है।

हरित क्रांति ने सबसे पहले किसानों से उनके बीज पर स्वामित्व छीना, उनके बैल और हल छीने, उनके देशी उपचार छीने। इसका परिणाम यह हुआ की हाइब्रिड बीजों का प्रयोग करिए। उनमें रोग लगें तो उन्ही कंपनियों के बनाये गए जहरीले पदार्थों को डालकर ठीक करिए। फैक्टरियों और वाहनों के माध्यम से जलाशयों और हवा को जहरीला किया गया, ताकि दवाई, वाहन बनाने-बेचने वालों का धंधा दिनोदिन फलता फूलता रहे। किसान और दस्तकार समुदाय इसका विरोध न करे, इसके लिए धर्म की बूटी सुंघा दी गई। यह बूटी कितनी असरकारक है? यह देखने के लिए 1986 से लेकर आज तक की राजनीति, शोषण और दरबदर किये जाते समुदायों को देख लीजिए, मरते-मार खाते किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों को देख लीजिए। फौजी और पुलिस में गए बेटों से मार खाते किसान बाप-मां को देख लीजिए। जनता का खून कब खौलता है, जब उनके भगवान पर कोई समस्या खड़ी हो जाती है, तब। हसन निसार कहते हैं कि, "अगर 6 फीट के आदमी को 2×2 फ़ीट के पिंजरे में 20 साल के लिए बन्द कर दो तो फिर वो ना सिर्फ कुबड़ा बाहर निकलेगा बल्की हमेशा के लिए कुबड़ा वह हो चुका होगा।" म्मतलब आप समझ रहे होंगे।

अभी मेरे कई अजीज हैं, जिनके परिवार के किसी न किसी सदस्य को कैंसर है। हर गांव में कितने टीबी और कैंसर के मरीज हैं, उनकी कोई व्यवस्थित गिनती नहीं हो पाई है। जाने कितने लोग हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, कई लोगों ने हार्ट फेल्योर, हार्ट अटैक जैसी सरकार द्वारा पैदा की गई बीमारियों से अपने अज़ीज़ों को खोया है। हमने भी विगत फरवरी में अपने बहुत अजीज को खोया है। दवाई वाले दुकानदार के साथ डॉक्टरों की सेटिंग है। दवाई कम्पनियां डॉक्टरों से सेटिंग करके चलती हैं। दोनो का उद्देश्य स्वास्थ्य न होकर मुनाफा है। तब हम क्या करें?

अब होगा ये कि इन्ही हाइब्रिड बीजों और उनके जहर को 'ऑर्गेनिक' के नाम पर रंग, आकार-प्रकार और परची बदल कर बेचा जाएगा, वो भी कई गुना अधिक कीमत बढ़ाकर। आपको और हमको तय करना है कि हम किसके साथ खड़े हैं? अपने साथ या हमें मौत परोसने वालों के साथ। अपने साथ, अपनी जिंदगी के साथ खड़े होने का मतलब है कि आप किसान के साथ खड़े हों, न कि कृषि उपज के साथ। फैसला आपको करना है, ज़िन्दगी भी आपकी है। बस ख़्याल रहे कि, आप और हम इस धरती पर आख़िरी पीढ़ी नहीं हैं। कम से कम आने वाली पीढ़ी को जीने लायक हवा, पानी, खाना तो देकर जाएं। किसानों से और अपनी सभ्यता, अपनी ज़मीन, अपनी विरासत से ये नासमझी भरी दूरी आपको कहीं का नहीं छोड़ेगी। जल्द ही आप भी कैसंर या हृदय रोग से ग्रसित हो सकते हैं। आपको तो इरफ़ान खान जैसी सुविधा भी नहीं मिलेगी।

आज जब इसे लिख रहा हूँ तो भी सिर दर्द से फट रहा है, आँखें एकदम लाल हुई पड़ी हैं। पिछले चार दिनों से नींद बहुत दूर लग रही है।
Vikash Anand की वाल से साभार

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 18 Apr 2020 at 6:30 PM -

jogging

कोरोना कदमताल जोगिंग: My most favorite

बंधुओं, यदि आप सौ साल तक जीना चाहते हो, तो रोजाना जोगिंग अवश्य किया करें. मेरा शायद ही कोई दिन जाता होगा कि मैनें सुबह हजार कदम जोगिंग ना की हो.
लेकिन चूंकि अभी आप बाहर निकल कर गार्डेन में ... जोगिंग नहीं कर सकते, इसलिये मैं आपको घर बैठे ही जोगिंग करने का तरीका बताता हूँ.
आज मैं आपको इसके लाभ और करने के तरीके बताता हूँ.
एक ही जगह पर खडे होकर धीरे-धीरे कदमताल करे. दोनो पैर सीधे और समानांतर रखे. अब पंजो के बल खडे होकर अपने घुटनो को आगे-पीछे करे. पूरा शरीर ढीला छोड दे, ताकि पूरा शरीर लयबद्ध होकर हिलने लगे. इसके बाद हथेलियो को भी बाये-दाये घुमाते हुए लयबद्ध करे. आप देखेंगे कि आप लट्टू की तरह ट्विस्ट करने लगे हैं. धीरे धीरे शुरु शुरु में थोडे प्रयास की जरूरत पडेगी पर धीरे धीरे बैलेंस करना आ जायेगा.
बस आपको एक ही स्थान पर सिर्फ पंजों पर खड़े खड़े होकर घुटने आगे-पीछे करते हुए ऊपर उठी हुई एड़ी को ऊपर-नीचे करना हैं, लेकिन कदमताल की तरह पंजे के बल उछलना नहीं है, जम्पिंग नहीं करनी है, बस पंजो पर जमीन से टिके रह कर ट्विस्ट करते रहे. एक मिनट में ही पसीना छलकने लगेगा.
शुरू में १५० कदम से शुरू करें और हर दिन १० कदम बढाते जाएँ. मुंह एकदम बंद, सांस सिर्फ नाक से लें और छोड़ें. आधे समय बाद नाक से सांस लें और मुंह से छोड़ें. लेकिन मुंह से सांस अंदर कभी भूल कर भी ना लें. जब हाँफने लगें, तो भी मुंह से सांस अंदर ना लें.
फिर थोडी देर आराम करे.
तो चलिए, अब मैं आपको इसके लाभ बताता हूँ. और एक बार आपनें इसे जान-समझ कर शुरू कर दिया, तो निश्चित तौर पर आपकी जिन्दगी स्वस्थ और लम्बी हो जायेगी
१. इस कदमताल जोगिंग का सबसे ज्यादा लाभ है- कैलोरी बर्न होना और मोटापे पर कंट्रोल होना.
२. हार्ट और ब्लडप्रेशर की प्रोब्लम लाइफ में कभी भी नहीं होगी. लेकिन यदि आपको आलरेडी हार्ट या ब्लडप्रेशर की प्रोब्लम है, तो डाक्टर की सलाह पर ही बेहद धीरे और कम समय के लिए करें.
३. जब आप जोगिंग करेंगे तो उतने समय आपकी चर्बी तेजी से जलेगी और फिर खुल कर भूख लगेगी. इस तरह आपकी पाचन शक्ति बढ़ेगी और भोजन आसानी से पचेगा.
४. इस जोगिंग से भर्स्तिका प्राणायाम साथ ही हो जाएगा. सांस नालियों में फैलाव आएगा और वे चौड़ी और लम्बी होती जायेगी. ये बेहद इम्पोर्टेंट रो है जोगिंग का
५. कफ़ बाहर निकलेगा. जब आप कदमताल जोगिंग करेंगे तो रात का जमा हुआ कफ उछल कर बाहर निकलने लगेगा और आपका सारा फालतू कफ़ बाहर निकल जाएगा.
६. यदि आप शाम को कदमताल जोगिंग करते हैं तो आपको नींद बड़ी मीठी और अच्छी आयेगी.
७. आपको अंदर से ख़ुशी महसूस होगी और आपका मूड पूरे दिन अच्छा बना रहेगा
८. घुटनों की समस्या नहीं आयेगी. लेकिन जिनके घुटने खराब हो चुके हैं, वे धीरे-धीरे करे.
९. आपका फिगर शेप बेहतर होगा
तो और फिर क्या चाहिए? क्यों? कल से ही शुरू कर रहे हैं ना?
बस इतना ध्यान रखियेगा कि कपड़े टाईट ना हो. बीच में एकाध घूँट पानी पी सकते हैं. और शुरुवात धीरे-धीरे ही करें और खत्म भी धीरे-धीरे ही करें. साथ में मीठे गाने भी सुने तो सोने पर सुहागाअ
ईश्वर आपको सदा स्वस्थ-नीरोगी बनाए और लम्बी आयु दे
कमल झँवर

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 12 Apr 2020 at 10:38 AM -

कोरोना का भय और कैलेस्ट्रोल का पर्दा~


अखबार वालो ने आंकड़े एकत्रित किये है। वह कह रहे है कोरोना वायरस के मरने वालों के अलावा शमशान और कब्रिस्तान में बहुत ज्यादा मुर्दे आ रहे है। अप्रत्यक्ष रूप से यह अखबार वाले कहना चाहते है कि यह लोग भी कोरोना वायरस से ही ... मर रहे है। जब कोरोना का भय भारत में शुरू हुआ तो उस समय मैंने अपने एक आलेख में कहा था कि इस वायरस से बड़ी बीमारी भारत में हार्ट अटैक है।

उस आलेख में चंद शब्द में बात खत्म कर दी थी और वैज्ञानिक आधार पर विस्तारपूर्वक नहीं कहा था। जिस तरह कोरोना वायरस छिपी हुई बीमारी है पहले कुछ सामने नहीं आता जब आदमी मृत्यु के निकट आ जाता है तो यह बीमारी सामने आ जाती है फिर भी यह बहुत समय देती है परन्तु हार्ट अटैक दस पंद्रह मिनट में सारे खेल खत्म कर देता है।

हार्ट अटैक से मरने वाले को आप समझते है, अरे यह क्या हुआ, इतना अचानक मर गया। जो आपको दिखाई नहीं देता आप उसे अचानक कहते है जबकि यह वर्षो की लंबी प्रक्रिया है।

हृदय की खून की नली में कैलेस्ट्रोल और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे पदार्थ के थक्के जमा होते है, जो आपको मांस, दूध और तेल से मिलते है और साथ में कामचोर और आलसी जीवन से मिलते है। आप तेल मांस खूब खाया करते है और थक्के जमते रहते है। हृदय की किसी नस में अस्सी फीसद तक थक्का जमने पर कोई दिक्कत नहीं होती है। कोई लक्षण नहीं आते है। हल्का सा दर्द भी शायद किसी को होता हो इसलिए आदमी कभी कैलेस्ट्रोल की जांच ही नहीं करवाता है।

थक्का जम जाना इतना घातक नहीं है। यह थक्का अगर बनता है तो हट भी जाता है, मेहनत कश और मांस तेल घी कम रखने या बिल्कुल नहीं खाने वालों को यह थक्का बनता ही नहीं है। इस थक्के पर एक झिल्ली है इस झिल्ली का फटना घातक होता है। जैसे ही झिल्ली फटती है वैसे ही हार्ट अटैक आता है क्योंकि पदार्थ नस में फेल जाता है और पूरी नस चौक हो जाती है। यह झिल्ली कभी भी फट सकती है, यह ज़रूरी नहीं कि 80 फीसदी पर ही फट जाए, चालीस फीसदी पर भी फट सकती है। जितना पदार्थ उस जगह एकत्रित होगा उतनी मात्रा में ही फैलेगा।

इस समय भय का माहौल है और आदमी यही सोच कर मर रहा कि अस्पताल बंद है मैं कहाँ जाऊंगा। चारो तरफ मौत ही मौत पर चर्चा है। जीवन की सारी खुशियां नष्ट हो चुकी है। शादी, क्लब, मॉल, मंदिर, मस्ज़िद यह सब खुशी मिलने वाली जगह है यह सब बंद है। इस समय यदि हृदय की नस में कैलेस्ट्रोल और ट्राइग्लिसराइड्स जमा है तो उसकी झिल्ली (पर्दा) इस भय से फट रही है। यह भय ब्लड प्रेशर और शुगर भी बढ़ा रहा है और उससे भी पर्दा फट रहा है। साथ में लोग तंबाकू सिगरेट भी खाते पीते है तो उससे ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है और अधिक ब्लड प्रेशर से भी पर्दा फट रहा है।

जो लोग तेल, घी, मांस, दूध अधिक खाते पीते है इस समय उनके मरने के सबसे अधिक चांस है क्योंकि मेहनत भी नहीं हो रही है और भय भी है। जब हार्ट अटैक आ जाता है तो संभालने वाले भी कोई नहीं है क्योंकि बायपास सर्जरी और एंजियोप्लास्टी पूरी तरह बंद है, जहां रोज़ 100 होती है वहां 5 हो रही है। यहां तक कोई परामर्श तक के लिए नहीं है जो रक्त पतला करने का सोर्बिट्रेट तक दे सकें जिससे थोड़ी सी तो राहत मिल सकें।

शादाब सलीम~

user image Arvind Swaroop Kushwaha - 26 Oct 2018 at 5:21 PM -

अदरक के औषधीय गुण-

आयुर्वेद में अदरक बहुत उपयोगी माना गया है। अदरक पाचनतंत्र के लिए लाभकारी होता है। कब्ज और डायरिया जैसी बीमारियों से भी बचाव करता है। इसीलिए भोजन में अदरक का प्रयोग किया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं अदरक के कुछ घरेलू ... प्रयोग जिनसे आप कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स का इलाज कर सकते हैं...

-अपनी गर्म तासीर की वजह से अदरक हमेशा से सर्दी-जुकाम की बेहतरीन दवाई मानी गई है। अगर आपको सर्दी या जुकाम की प्रॉब्लम है, तो आप इसे चाय में उबालकर या फिर सीधे शहद के साथ ले सकते हैं। साथ ही, इससे हार्ट बर्न की परेशानी भी दूर होती है।

- रोज सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक टुकड़ा खाएं। इससे खूबसूरती बढ़ती है।

- अदरक का एक छोटा टुकड़ा छीले बिना (छिलकेसहित) आग में गर्म करके छिलका उतार दें। इसे मुंह में रख कर आहिस्ता-आहिस्ता चबाते चूसते रहने से अन्दर जमा और रुका हुआ बलगम निकल जाता है और सर्दी-खांसी ठीक हो जाती है।

-बहुत कम लोग जानते हैं कि अदरक एक नेचुरल पेन किलर है, इसलिए इसे आर्थराइटिस और दूसरी बीमारियों में उपचार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

-अदरक कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करता है। दरअसल, यह कोलेस्ट्रॉल को बॉडी में एब्जॉर्व होने से रोकता है।

-कैंसर में भी अदरक बेहतरीन दवाई मानी गई है। खासतौर पर ओवेरियन कैंसर में यह काफी असरदार है।

-यह हमारे पाचन तंत्र को फिट रखता है और अपच दूर करता है।

-अदरक के इस्तेमाल से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है।

-अदरक खाने से मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं

- नशा छुड़वाने के लिए::
अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा
काला नमक(सैंधा नमक) मिला लो और इसको धूप मे सुखा लो किसी कांच या चीनीमिट्टी के बर्तन में डाल कर ! सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए और अदरक सूख जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो ! जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है ! तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो ! और यह अदरक ऐसे अद्भुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है ! इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी ! तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा ! बहुत आसान है, कोई मुश्किल काम नहीं है !

कॉपी किया हुआ